बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

भोर के सूरज

किरण के रथ पर सवार भोर के सूरज
विजय का तू कर श्रृंगार भोर के सूरज


तू स्वयं अग्नि शिखा है कर्म पथ पर
तू जो चाहे होम हो जा धर्म पथ पर
स्वयं के बल को निहार भोर के सूरज
विजय का तू कर श्रृंगार भोर के सूरज


मार्ग दुर्गम है बहुत सब जानते हैं
प्रबल झंझावात है सब मानते हैं
कंटकों से तू न हार भोर के सूरज
विजय का तू कर श्रृंगार भोर के सूरज


अग्रसर हो कर समर्पण कर समर्पण
विश्व का तू पुनः कर फ़िर मार्ग दर्शन
दूर कर ये अंधकार भोर के सूरज
विजय का तू कर श्रृंगार भोर के सूरज