गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

जीवन

सुख जो तूने भोगा है, दुःख भी तुझको सहना है
दीपक चाहे तेज़ जले, तल में तो अँधेरा रहना है

लोभ, मोह, माया की मद में, अँधा हो कर दौड़ रहा
अंत समय में सब को भईया राम नाम ही कहना है

तेरा मेरा सबका जीवन पल दो पल का लेखा है
गिन कर सबकी साँसे, चोला पञ्च-तत्त्व का पहना है

सागर की लहरों सा जीवन तट की और है दौड़ रहा
किस को मालुम तट को छू कर लहरों को तो ढहना है

मुँह न मोड़ो तुम सपनो से, सपनो से तो है जीवन
सपने जब तक आंखों में, जीवन चलते रहना है



खुशियाँ सबकी अपनी, दुःख भी सबका अपना हैं
जीवन बच्चे की मुट्ठी में, रेत भरा इक सपना है