बुधवार, 17 दिसंबर 2008

रिश्ते

काश ये रिश्ते
पतझड़ के पत्तों की तरह होते
मौसम के साथ बदल जाते....

काश ये रिश्ते
बादल की तरह होते
बरसते बिखर जाते....

काश ये रिश्ते
बहती हवा होते
छूते गुज़र जाते....

दिल के किसी कोने मैं
गहरा घाव तो न बनाते
आंसूं बन कर
पिघलते तो न रहते....

कितना अच्छा होता,
ये रिश्ते ही न होते................