बुधवार, 31 दिसंबर 2008

घर मेरा मेरी जियारत

२००९ की ढेरों शुभ-कामनाएं

नव वर्ष मंगलमय हो, सबके दुखों का क्षय हो
प्रभू चरण में वंदन है, सबका जीवन सुखमय हो

इस साल की अन्तिम रचना है यह, आप सब का आभार है जो मुझे प्रोत्साहित करते रहते हैं.


प्यार से कैसी शिकायत
प्यार तो रब की अमानत

हम भी तेरे दिल में रहते
वक़्त की होती इनायत

चूमते क़दमों को तेरे
आप की होती इजाज़त

ताज है जिनके सरों पर
लोग करते हैं इबादत

धूप या सर्दी का मौसम
बेघरों पर है क़यामत

काट कर पीपल घरों का
धूप से क्यों है शिकायत

देश की सीमायें अक्सर
खून से लिक्खी इबारत

जंग का ऐलान है यह
आग से जलती इमारत

मार खाते, लौट आते
है यही कुत्तों की आदत

बारिशों ने फूल धोये
खुशबुओं ने की बगावत

हाथ में जिनके छुरा था
मिल गयी उनको ज़मानत

आस्था या सत्य है यह
आब-ऐ-गंगा में नज़ाफत

लौट कर कब जाउंगा मैं
घर मेरा मेरी जियारत

(नज़ाफत - शुद्धता, स्वछता, जियारत-तीर्थ यात्रा, धर्म स्थल पर जाना)