बुधवार, 15 अप्रैल 2009

मन में एक अंश भी बजरंग नही

आप नही जिंदगी में रंग नही,
रस नही, खुशी नही, उमंग नही,

आज हैं रूठे तो कल साथ होंगे,
दोस्ती की बात है कोई जंग नही,

प्यार के धागों से बँधा है बंधन,
कट गयी जो डोर तो पतंग नही,

खून के धब्बे हैं वो इंसानियत के,
फर्श पर बिखरा था लाल रंग नही,

इस शहर के रास्ते चौड़े हैं बहुत,
गाँव की पगडंडियाँ भी तंग नही,

राम के आदर्श तो बस नाम के,
मन में एक अंश भी बजरंग नही,

मौत से आगे का सफ़र है यारो,
तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,