सोमवार, 20 जुलाई 2009

चाहत

महसूस किया है
झुर्मुट की आड़ से
पीले समुंद्र के उस पार से
कोई तो गुज़रा है
इस रेत के पहाड़ से
ताज़ा है अभी
कुछ कदमों की आहट
रेत के समुंदर में
उड़ रही है चाहत
वो चाँद है पूनम का
या खुश्बू तेरे एहसास की
जन्म-जन्मांतर की प्यास है
या बात है इक रात की
सोच लेंगे कभी फ़ुर्सत में
अभी तो जी लेने दो ये लम्हा