गुरुवार, 13 अगस्त 2009

यादों की नागफनी

उग आये हैं
समय की नागफनी पर
याद के कांटे
नोचने के अनवरत प्रयास में
चुभता हैं दंश
बीती बातों का
पूनम की रातों का
गुज़रे मधुमास का
अनबुझी प्यास का
लहुलुहान हाथों के
रिस्ते खून के साथ
बहा देना चाहता हूँ
तेरी यादों का जंगल
हमेशा हमेशा के लिए

पर ये नागफनी
सूख कर गिरती भी तो नहीं