बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

तुम तक पहुँचने से पहले

१)

तुम तक पहुँचने से पहले
लड़खड़ा कर गिर गए कुछ शब्द
घायल शब्दों की झिर्री से
बिखर गयी चाहत
बह गए एहसास
कुछ अधूरे स्वप्न
मिलन की प्यास

उफ़ ......... इन घायल शब्दों को
बैसाखी भी तो नहीं मिलती

२)

तुम तक पहुँचने से पहले
लड़खड़ा कर गिर गए कुछ शब्द
वो देखो ...........
रेत के पीली समुन्दर में
शब्दों का जंगल उग आया है
शोर से महकते जंगल को
अभिव्यक्त हो जाने की प्यास है
तू कभी तो इस रास्ते से गुजरेगा
बस तेरी ही उसको तलाश है

सुना है गुज़रे मुसाफिर
लौट कर ज़रूर आते हैं