मंगलवार, 10 नवंबर 2009

बिखरे शब्द ......

१)

तुम तक पहुँचने से पहले
कुछ अन्जाने शब्द
बिखर गये थे तुम्हारे रास्ते
अनदेखा कर शब्दों की चाहत
मसल दिए तुमने
उनके अर्थ, उनकी अभिव्यक्ति
उनकी चाहत, मौन अनुरक्ति
शब्दों का उमड़ता सैलाब
अब समुन्दर हो गया है
बिखरने को बेताब शब्द
अश्वथामा हो गए हैं
भटक रहे हैं तेरी तलाश में
दर बदर

सुना है द्वापर तो चला गया
कहीं कलयुग भी न गुज़र जाए .......

२)

कुरेद रहा हूँ
दिल में दबी
मुहब्बत की राख
सुना है
राख के ढेर में
चिंगारी दबी रहती है .......