सोमवार, 16 नवंबर 2009

देश का बदला हुवा वातावरण है

एक बार फिर से हिन्दी में ग़ज़ल कहने का प्रयास है ....गुरुदेव पंकज जी के आशीर्वाद ने इसको संवारा है .... आपके स्नेह, सुझाव और आशीर्वाद की आकांक्षा है .......

आज प्रतिदिन सत्य का होता हरण है
देश का बदला हुवा वातावरण है

काश मन से भी वो होते साफ़ सुथरे
जिनके तन पर साफ़ सुथरा आवरण है

बस गयी बारूद की खुशबू हवा में
इस तरह से सड़ चुका पर्यावरण है

भूख से वो उम्र भर लड़ता रहेगा
जिसने ढूंढा ताल छंद और व्‍याकरण है

हैं मेरे भी मित्र क्या तुमको बताऊँ
सांप से ज्यादा विषैला आचरण है

प्रेम के दो बोल हैं सपनों की बातें
विष में डूबा आज हर अन्तःकरण है