सोमवार, 25 जनवरी 2010

कुछ ऐसे सिरफिरों के चाहने वाले मिले हैं

गुरुदेव के हाथों सँवरी ग़ज़ल .......

वो जिन के मन पे नफरत के सदा जाले मिले हैं
कुछ ऐसे सिरफिरों के चाहने वाले मिले हैं

समय के हाथ पर जो लिख गये फिर नाम अपना
उन्ही के पाँव में रिस्ते हुवे छाले मिले हैं

जो तन पर ओढ़ कर बैठे हैं खादी की दुशाला
उन्ही के मन हमेशा से घने काले मिले हैं

समय ने दी तो थी दस्‍तक मेरे भी घर पे लेकिन
मेरी किस्‍मत उसे घर पर मेरे ताले मिले हैं

वो जिन हाथों में रहती थी सदा क़ुरआन गीता
उन्‍हीं हाथों में मदिरा के हमें प्‍याले मिले हैं

अमन की बात करते थे जो कल संसद भवन में
उन्ही की आस्तीनों में छुरे भाले मिले हैं