मंगलवार, 21 सितंबर 2010

क्षणिकाएँ

१) रेखाएँ

हर नये दर्द के साथ
बढ़ जाती है
नयी रेखा हाथ में
और लोग कहते हैं
हाथ के रेखाओं में
भविष्य छिपा है ...

२) चाँद

आसमान में
अटका
तारों में
भटका
सूरज के आते ही
खा गया
झटका

३)

साँसों के साथ खींच कर
दिल में रख लूँगा तुझे
सुना है
खून के कतरे
फेफड़ों से हो कर
दिल में जाते हैं