बुधवार, 19 जनवरी 2011

मुहब्बत

खुदा की है ये दस्तकारी मुहब्बत
जमीं पे है किसने उतारी मुहब्बत

उमड़ती घटाएं महकती फिजायें
किसी की तो है चित्रकारी मुहब्बत

तेरी सादगी गुनगुनाती है हर सू
मुहब्बत मुहब्बत हमारी मुहब्बत

तेरे गीत नगमें तेरी याद लेकर
तेरा नाम लेकर संवारी मुहबत

पनपने लगेंगे कई ख्वाब मिल के
जो पलकों में तूने उतारी मुहब्बत

मुहब्बत है सौदा दिलों का दिलों से
न मैं जीत पाया न हारी मुहब्बत

सुनाते हैं जो लैला मजनू के किस्से
वो कहते हैं कितनी हे प्यारी मुहब्बत

चली है जुबां पर मेरा नाम लेकर
वो नाज़ुक सी अल्हड कुंवारी मुहब्बत

है बदली हुई वादियों की फिजायें
पहाड़ों पे हे बर्फ़बारी मुहब्बत

अमीरों को मिलती है ये बेतहाशा
गरीबों को है रेजगारी मुहब्बत

ज़माने के झूठे रिवाजों में फंस कर
लुटी बस मुहब्बत बिचारी मुहब्बत

है दस्तूर कैसा ज़माने का देखो
सदा ही है पैसे से हारी मुहब्बत

फटेहाल जेबों ने धीरे से बोला
चलो आज कर लो उधारी मुहब्बत