रविवार, 20 फ़रवरी 2011

विश्वास

अविश्वास का बस एक पल
और तुम्हारे आँसुओं का सैलाब

हर दहलीज़ लाँघ कर बहा ले गया
विश्वास के मज़बूत लम्हे
रिश्तों का आधार
कच्चे धागों की गरिमा
साथ फेरों का बंधन
वक़्त की खुरदरी सतह पर बिखर गये
कुछ तुम्हारे
कुछ मेरे
कुछ मिल कर देखे ख्वाब

न जाने क्यों
दम तोड़ते ख्वाबों से
भविष्य की आशा चुरा ली मैने
सहेज ली उम्मीद की वो किरण
जो साँस लेती थी हमारी आँखों में

अब जब कभी
तुम्हारी सूखी आँखों में
विश्वास की नमी नज़र आएगी
चुपके से भर दूँगा
भविष्य के कुछ सपने
आशाओं का रोशनी

जला दूँगा वो सब लम्हे
जो उड़ा ले गये
तुम्हारा
मेरा
कुछ हम दोनो का ...
विश्वास