सोमवार, 6 जून 2011

जिंदगी वो राग जिसका सम नही है

जी लिया जो ज़िंदगी में कम नही है
लौट के आ जाऊं इतना दम नही है

एक पन्छी आसमाँ में उड़ रहा है
राह में जिसका कोई हमदम नही है

रोज़ की जद्दो-जहद पैदाइशी है
जिंदगी वो राग जिसका सम नही है

अनगिनत हैं लोग पीछे भी हमारे
बस हमारे हाथ में परचम नही है

किसके जीवन में कभी ऐसा हुवा है
साथ खुशियों के रुलाता गम नही है

बन गया मोती जो तेरा हाथ लग के
अश्क होगा वो कोई शबनम नही है

जिंदगी गुज़री है कुछ अपनी भी ऐसे
साज़ है आवाज़ है सरगम नही है