बृहस्पतिवार, 8 सितम्बर 2011

स्व ...

मेरी प्रवृति

भागने की नही

पर कृष्ण को देवत्व मिला

सिद्धार्थ को बुद्धत्व मिला

कभी तो मैं भी पा लूँगा

अपना

"स्व"

82 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत गहन ... जिस दिन प्राप्त हो जायेगा "मैं " सार्थक होगा जीना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

कम शब्दों में गूढ़ बात!
--
बहुत उम्दा!

सदा ने कहा…

बहुत ही गहरे उतरते शब्‍द ।

वन्दना ने कहा…

बेहद गहराई मे उतर कर लिखा है और यही वो सत्य है जिसकी खोज मे हम सभी लगे हैं।

नीरज गोस्वामी ने कहा…

हम सब खुद को ही तो तलाश रहे हैं...वाह...कैसे कम शब्द खर्च करके बहुत बड़ी बात करें ये कोई आप से सीखे...बेहतरीन दिगंबर भाई...बधाई स्वीकारें

नीरज

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मनुष्य यदि स्वयं को खोज ले या पा ले तो यह एक उपलब्धि है .
लेकिन मैं शब्द अहंकार का प्रतीक माना जाता है .
कृपया प्रकाश डालें नासवा जी .

रविकर ने कहा…

जात - पांत न देखता, न ही रिश्तेदारी,
लिंक नए नित खोजता, लगी यही बीमारी |

लगी यही बीमारी, चर्चा - मंच सजाता,
सात-आठ टिप्पणी, आज भी नहिहै पाता |

पर अच्छे कुछ ब्लॉग, तरसते एक नजर को,
चलिए इन पर रोज, देखिये स्वयं असर को ||

AAPKI SUNDAR RACHNA
CHARCHA-MANCH PAR ||

दिगम्बर नासवा ने कहा…

डाक्टर साहब आपका कहना उचित हिया शायद मुझे स्व लिखना चाहिए था यहाँ पर ... सोच कर तो यही लिखा था ... पर शब्द का चयन गलत हो गया ... गलती ठीक करना उचित रहेगा ... आपका बहुत बहुत शुक्रिया ...

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

आज तक की आपनी सबसे उत्कृष्ट रचना. इस 'मैं' को पी जाना मनुष्य को महापुरुषों से पृथक करता है. शेक्सपियर की एक ट्रेजडी है "हेलमेट" ..एम ए के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में मैंने लिखा था कि हेलमेट के दुखद अंत का सबसे बड़ा कारण उसका अनिर्णय की स्थिति में होना और 'मैं' के प्रति आशक्त होना था. उस नाटक में हेमलेट के अधिकांश संवाद "आई" से शुरू होते हैं. बहुत बढ़िया कविता...

केवल राम : ने कहा…

इस "स्व" को पा लेना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है ......! जीवन की सार्थकता इस स्व को पहचाने में ही है ....आपका आभार

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

इसी स्व की खोज में ज़िन्दगी गुजर जाती है ..बेहतरीन लिखा है आपने ..स्व में स्व की खोज ..बहुत ही दिल को आकर्षित कर जाती है ..

singhSDM ने कहा…

स्व की खोज में अच्छे सवालों को उठाती यह रचना.... दिलो-दिमाग को छू गयी. बेहतरीन लिखा है आपने ....लाजवाब रचना......!!!!

रचना ने कहा…

मिल भी गया गर तुम्हारा स्व तुमको
क्या कृष्ण और बुद्ध तुम बन पाओगे
और बन भी गये
तो भी क्या पाओगे
ये स्व बहुत भागता हैं
जब मिलता हैं
पाने वाला विलोम हो जाता हैं

यादें ने कहा…

टिप्पणियाँ पढ़ कर लगा !आप तो बधाई के पात्र हैं बधाई स्वीकार करें .....
खुश रहें ,खुश रखें !
शुभकामनायें !

shikha varshney ने कहा…

ओह बहुत मुश्किल काम है. देवत्व और बुद्धत्व इसके मुकाबले में आसान हैं शायद.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत बढ़िया नासवा जी ।
अब भाव और प्रस्तुति में पूर्ण सामंजस्य हो गया है ।
बेहतरीन ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

यह स्व ही तो है जो समझता है ... इस पहलू से देखता है

sushma 'आहुति' ने कहा…

बेहतरीन....

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

स्व मिले ना मिले स्व की तलाश में समर्पित यह जीवन हो।

Sunil Kumar ने कहा…

एक गुढ़ रचना , अच्छी लगी

S.N SHUKLA ने कहा…

bahut khoobsoorat , behtar chintan, thanks

Apanatva ने कहा…

bahut khoob!

Rachana ने कहा…

sva ki prapti jab hogi chaon aor ujala hoga
sunder bhav
rachana

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

गहरी सोच लिए पंक्तियाँ

PRIYANKA RATHORE ने कहा…

बेहतरीन लिखा है आपने ....लाजवाब रचना......!!!!

sm ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

Pallavi ने कहा…

चोटी मगर गहन विचारों से परिपूर्ण अभिवयक्ति रचना जी बात से सहमत हूँ,
कभी समय मिले आपको तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/

Kunwar Kusumesh ने कहा…

विचारणीय प्रश्न छोड़ा है आपने ,नासवा जी.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अतयंत उत्कॄष्ट रचना, शुभकामनाएं.

रामराम

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रवृत्ति और निर्वृत्ति के बीच की दशा।

rashmi ravija ने कहा…

चंद पंक्तियों में गहन चिंतन
गागर में सागर.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

द अल्टीमेट!!

संध्या शर्मा ने कहा…

इस स्व की खोज में इन्सान अपना सारा जीवन बिता देता है ... शुभकामनायें है आपके लिए आप इसे पा सकें... गहन चिंतन....

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

इसी स्व की खोज में सब लगे हैं...आपके लिए इतना ही कहूंगी..आमीन !!

आशा जोगळेकर ने कहा…

बुध्द और कृष्ण बनना सब के लिये संभव ना हो शायद, पर स्व की खोज में अपनत्व पा लिया तो भी बहुत होगा ।
बेहद खूबसूरत रचना ।

Arvind Mishra ने कहा…

मगर दोनों को स्व बिना भागे नहीं मिला -आपको भी इसके लिए भागना पड़ेगा त्यागना पड़ेगा ...गृहत्यागी बुद्ध और रणछोड़ कृष्ण की तरह -हां मुला ब्लागिंग से मत फूट लीजियेगा -काहें कि पहले लोग बाग़ यही से भाग लेते हैं ! :)

vandana ने कहा…

स्वत्व को पाने के लिए एक कदम उठा है तो मंजिल भी मिल ही जायेगी

वाणी गीत ने कहा…

अपनी कविता की पंक्ति ही लिख दूं ...
जिंदगी उस दम ही लगी सबसे भली , जब मैं जिंदगी से मैं बन कर ही मिली !

Bhushan ने कहा…

'त्व' की अपेक्षा 'स्व' को पा लेना कहीं बेहतर है.

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

प्रयास जारी रखें नासवा साहब , मिलेगा, जरूर मिलेगा !

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

वाह! सर!

सादर

mridula pradhan ने कहा…

ekdam gagar men sagar.........bhar diya aapne,

रेखा ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति ...

संजय भास्कर ने कहा…

स्व की खोज में अच्छे सवालों को उठाती यह रचना
उम्दा सोच
भावमय करते शब्‍दों के साथ गजब का लेखन ...आभार नासवा जी ।

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

बड़ा मुश्किल है मेरे लिए टिप्पड़ी करना! इस 'स्व' को पाने की तलाश में बहुत से लोग है सर जी!

Kailash C Sharma ने कहा…

कुछ शब्दों में गहन अभिव्यक्ति। बहुत उत्क्रष्ट प्रस्तुति।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर सार्थक अभिव्यक्ति ....

veerubhai ने कहा…

स्व ...
मेरी प्रवृति

भागने की नही

पर कृष्ण को देवत्व मिला

सिद्धार्थ को बुद्धत्व मिला

कभी तो मैं भी पा लूँगा

अपना

"स्व"स्थित प्रग्य ,दृढ निश्चय भाव लिए है रचना .सुन्दर !सार्थक मनोहर .

शोभना चौरे ने कहा…

bahut sundar

Maheshwari kaneri ने कहा…

इसी स्व की खोज में ज़िन्दगी गुजर जाती है .पर हिम्मत न हारना..कोशिश करने पर मंजिल मिल ही जाती है..

रंजना ने कहा…

भाग कर कहाँ,स्व में रमकर ही तो देवत्व मिलता है...

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

'स्व' तो आपके पास है पर 'तत्व' मिले, ऐसी कामना है !

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

रणछोड़दास तो नहीं न बने :)

Dr Varsha Singh ने कहा…

जीवन्त विचारों की बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

सुमन'मीत' ने कहा…

gahan abhivyakti..jis din vo mil jayega...jina safal ho jayega

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

मैं तो इतना ही कहूंगा कि जिन खोजां तिन पाइयां..
और हर किसी में गोता मारकर स्व पाने की हिम्मत नहीं होती.

ashish ने कहा…

अद्भुत , समझ गया .

प्रेम सरोवर ने कहा…

आपको अपना स्व जरूर मिलेगा ।धन्यवाद ।

Patali-The-Village ने कहा…

हिम्मत न हारना| कोशिश करने पर मंजिल मिल ही जाती है| धन्यवाद|

'साहिल' ने कहा…

वाह वाह! गागर में सागर सामान हैं ये पंक्तियाँ!

निवेदिता ने कहा…

इस स्व को पा लेना ही तो जीवन की सार्थकता है .... बहुत अच्छा सोचा है ....

निवेदिता ने कहा…

इस स्व को पा लेना ही तो जीवन की सार्थकता है .... बहुत अच्छा सोचा है ....

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

jaroor pa lenge....lekin uske liye kon se vriksh ke neeche baithenge ya kya revolution layenge, ye sab to pahle se hi plan karna padega na ?

:)

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

कवि नीरज के शब्दों में-
ज़िंदगी भर होती रही, गुफ्तगू गैरों से मगर
अब तलक अपनी न खुद से मुलाकात हुई.

मनोज कुमार ने कहा…

खुद को पहचान लिया फिर तो बस उसकी पहचान हो गाई।

विशाल ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना.सव से ही तो सर्वस्व मिल जाता है.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

उत्कृष्ट....
लगभग मौन होकर सब कुछ कहती रचना...
सादर साधुवाद....

G.N.SHAW ने कहा…

" स्व " - बहुत ही पूर्ण

Amrita Tanmay ने कहा…

काश... मिल जाता '''स्व'''

Rekhaa Prahalad ने कहा…

'स्व' को पाने की तलाश में.........मै भी इसी दौड़ में लगी हूँ. ..

abhi ने कहा…

ohh...waah waah...how beautiful...
kitni khoobsurat baat hai :)

mahendra verma ने कहा…

अपने स्व को पाना ही जीवन का लक्ष्य है।

विचारपूर्ण कविता।

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

कम लफ्जों में बडी बात, यही है कविता की सार्थकता।

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कब तक ढ़ोना है मम्‍मी, यह बस्‍ते का भार?
आओ लल्‍लू, आओ पलल्‍लू, सुनलो नई कहानी।

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

क्षमस्व परमेश्वर

आप बहुत डूब के लिखते हैं दिगंबर भाई। बधाई स्वीकार करें।

Rakesh Kumar ने कहा…

मो को कहाँ ढूँढता रे बंदे, मैं तो तेरे पास में.
आपकी 'स्व' की प्रस्तुती बहुत अच्छी लगी दिगंबर जी.
मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.नई पोस्ट जारी की है.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

गहन विचार। बोध होते ही बुद्धत्व मिलेगा देते ही देवत्व!

veerubhai ने कहा…

जीवन को ऊर्ध्व गति देती ही ये रचना .बधाई !आपकी ब्लोगिया दस्तक हमारे लिए प्ररक है उत्प्रेरक है लेखन का .चिंतन का .

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

ऊर्जा से भरी दूसरों में ऊर्जा भरती बेहतरीन रचना ....... आभार

Suman ने कहा…

srujan bhi to sva ko pane kahi tarika hai ....sunder.

Anil Avtaar ने कहा…

आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं.. माता सबों को खुश और आबाद रखे..
जय माता दी..

सुनील गज्जाणी ने कहा…

namaskar !'' swa '' hi aaj duniyaa me haavi hai . jaha dekho aaj har aur yahi nnazar aaya hai .
sadar

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

सुन्दर .....शीघ्र पा लीजिये आप भी ....शुभ कामनाये .....हमारे सभी मित्रो को आप के साथ साथ विजय दशमी की हार्दिक शुभ कामनाएं -सौभाग्य से कुल्लू में प्रभु श्री राम के दर्शन हुए और मन में आया आप सब के बीच भी इस शुभ कार्य को बांटा जाए .--

आभार आप का
भ्रमर ५