मंगलवार, 20 सितंबर 2011

नम सी दो आँखें रहती हैं ...

गुरुदेव पंकज जी ने इस गज़ल को खूबसूरत बनाया है ... आशा है आपको पसंद आएगी ...

प्यासी दो साँसें रहती हैं
नम सी दो आँखें रहती हैं

बरसों से अब इस आँगन में
बस उनकी यादें रहती हैं

चुभती हैं काँटों सी फिर वो
दिल में जो बातें रहती हैं

शहर गया है बेटा जबसे
किस्मत में रातें रहती हैं

उनके जाने पर ये जाना
दिल में अब आहें रहती हैं

पत्‍थर मारा तो जाना वो
शीशे के घर में रहती हैं

पीपल और जिन्नों की बातें
बचपन को थामें रहती हैं