शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

हाथ में सरसों उगा कर देखिये...

धार के विपरीत जा कर देखिये
जिंदगी को आजमा कर देखिये

खिड़कियों से झांकती है रौशनी
रात के परदे उठा कर देखिये

आंधियाँ खुद मोड लेंगी रास्ता
एक दीपक तो जला कर देखिये

भीगना जो चाहते हो उम्र भर
प्रीत गागर में नहा कर देखिये

होंसला तो खुद ब खुद आ जायगा
सत्य को संबल बना कर देखिये

जख्म अपने आप ही भर जायंगें
खून के धब्बे मिटा कर देखिये

बाजुओं का दम अगर है तोलना
वक्त से पंजा लड़ा कर देखिये

दर्द मिट्टी का समझ आ जायगा
हाथ में सरसों उगा कर देखिये