रविवार, 20 फ़रवरी 2011

विश्वास

अविश्वास का बस एक पल
और तुम्हारे आँसुओं का सैलाब

हर दहलीज़ लाँघ कर बहा ले गया
विश्वास के मज़बूत लम्हे
रिश्तों का आधार
कच्चे धागों की गरिमा
साथ फेरों का बंधन
वक़्त की खुरदरी सतह पर बिखर गये
कुछ तुम्हारे
कुछ मेरे
कुछ मिल कर देखे ख्वाब

न जाने क्यों
दम तोड़ते ख्वाबों से
भविष्य की आशा चुरा ली मैने
सहेज ली उम्मीद की वो किरण
जो साँस लेती थी हमारी आँखों में

अब जब कभी
तुम्हारी सूखी आँखों में
विश्वास की नमी नज़र आएगी
चुपके से भर दूँगा
भविष्य के कुछ सपने
आशाओं का रोशनी

जला दूँगा वो सब लम्हे
जो उड़ा ले गये
तुम्हारा
मेरा
कुछ हम दोनो का ...
विश्वास

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

समानांतर रेखाएं

याद है वो तमाम मसले
समाजवाद और पूंजीवाद की लंबी बहस
कार्ल मार्क्स के आर्थिक सिद्धांत
मानव अधिकारों को लेकर आपसी मतभेद
फ्रायड का विवादित मनोविज्ञान
मैकाले की शिक्षा पद्धति
कितनी आसानी से एकमत हो गये
इन विवादित मुद्दों पर

मेरे आई. ऐ. एस. के सपने
तुम्हारे समाज सेवा के ख्वाब
बहस समाप्त होते होते
इस मुद्दे पर भी एकमत हो गये थे

याद है उन दिनों
दिन पंख लगा कर उड़ जाते थे
रात पलक झपकते बीत जाती थी
एस एम एस का लंबा सिलसिला
थमता नही था

गुलज़ार की नज़मों में जीने लगे थे हम

फिर वक़्त के थपेड़ों ने
हालात की खुरदरी सतह पर
जाने कब खड़ी कर दी
अहम की हल्की दीवार

हमारे बीच आ गया
ईगो का पतला आवरण
पता नहीं कब खिंच गयी हम दोनों के बीच
कभी न मिलने वाली दो समानांतर रेखाएं

मैं तो आज भी निरंतर दौड़ रहा हूँ
अपनी रेखा पर

सुना है समानांतर रेखाएं
अनंत पर जा कर मिल जाती हैं