सोमवार, 9 अप्रैल 2012

बड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना ...


किसी को उम्र भर सर पर बिठाना
बड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना

हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना

मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
कभी तन्हाई में सुनना सुनाना

बड़ी मासूम सी उनकी अदा है
उठा कर के गिराना फिर उठाना

जुनूने इश्क में होता है अक्सर
लगी हो चोट फिर भी मुस्कुराना

जला कर ख़ाक कर सकते हैं घर को
चरागों से है रोशन यूँ ज़माना

कहाँ आसान होता है किसी को 
किसी भी गैर का हंसना हँसाना

नहीं आती है सबको रास शोहरत
बुलंदी पर नही रहता ठिकाना 
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