बुधवार, 12 सितंबर 2012

आज के हालात ...


छोटी बहर की गज़लों के दौर में प्रस्तुत है एक और गज़ल, आशा है पसंद आयगी ...

आवाम हाहाकार है 
सब ओर भ्रष्टाचार है 

प्रतिपक्ष है ऐंठा हुवा 
सकते में ये सरकार है 

सेवक हैं जनता के मगर 
राजाओं सा व्यवहार है 

घेराव की न सोचना 
मुस्तैद पहरेदार है 

रोटी नहीं इस देश में 
मंहगी से मंहगी कार है 

मिल बाँट कर खाते हैं पर 
इन्कार है इन्कार है