रविवार, 12 मई 2013

मातृ दिवस ...


सब कह रहे हैं 
आज मातृ दिवस है 

तुझे याद करने का दिन 

पर याद तो तब किया जाता है न माँ 
जब किसी को भूला जाए 
तो क्या जो आज का दिन मनाते हैं 
भूल चुके हैं माँ को ...? 

या आज के दिन याद करके 
फिर से भुलाने की तैयारी में हैं माँ को ...? 

शायद ये कोशिश हैं मनाने की उस परपरा को 
जहां माँ तो फिर भी माँ ही रहती है 
पर भूल जाते हैं बच्चे अपने बेटे होने का फ़र्ज़ 

और किसी एक दिन के सहारे ही सही   
उस एहसास को याद कराना भी तो जरूरी है 

हालांकि ये अपनी परंपरा नहीं 
पर तू तो जानती है समय के चक्र को 
परिवर्तन के नियम को 
जिसने घेर लिया है 
हम सबको भी अपने चक्र में 

वैसे भी जब हर दिन तू रहती है साथ 
याद आती है किसी न किसी बहाने  
तो आज एक और बहाने से भी तुझे याद करूं 
कोई बुराई तो नहीं इस बात में ... 

मुझे मालुम है तू हंस रही है आज ...