सोमवार, 27 मई 2013

काजल रोज़ लगाने का मन करता है ...


तुझसे लाड लड़ाने का मन करता है 
बचपन में फिर जाने का मन करता है 
तेरा आना मुश्किल है फिर भी अम्मा 
तुझको पास बुलाने का मन करता है 
तुझसे लाड लड़ाने का ... 

याद है नानी जब जब घर में आती थी 
तू उस दिन खुद भी बच्चा बन जाती थी 
गाती थी जिन गीतों को तू मस्ती में   
उन गीतों को गाने का मन करता है 
तुझसे लाड लड़ाने का ... 

लग न जाए नज़र लगाती थी काजल 
लगता था उस वक़्त की अम्मा है पागल 
अब जब सर पे नहीं रहा कोई आँचल 
काजल रोज़ लगाने का मन करता है 
तुझसे लाड लड़ाने का ... 

करता हूं महसूस तेरा साया अक्सर 
राह में जब भी आता है कोई पत्थर 
कांटे जब जब करते हैं मुझको विचलित 
तेरी गोदी जाने का मन करता है 
तुझसे लाड लड़ाने का ...