मंगलवार, 20 अगस्त 2013

हादसे जो राह में मिलते रहे ...

फूल बन के उम्र भर खिलते रहे 
माँ की छाया में जो हम पलते रहे 

बुझ गई जो रौशनी घर की कभी   
हौंसले माँ के सदा जलते रहे 

यूं ही सीखोगे हुनर चलने का तुम 
बचपने में पांव जो छिलते रहे 

साथ में चलती रही माँ की दुआ 
काफिले उम्मीद के चलते रहे 

हर कदम हर मोड़ पे माँ साथ थी 
उन्नती के रास्ते खुलते रहे  

माँ बदल देती है खुशियों में उन्हें 
हादसे जो राह में मिलते रहे