सोमवार, 20 जनवरी 2014

कायनात का ये कौन चित्रकार है ...

इक हसीन हादसे का वो शिकार है
कह रहे हैं लोग सब की वो बीमार है

शाल ओढ़ के ज़मीं पे चाँद आ गया
आज हुस्न पे तेरे गज़ब निखार है

जल तरंग बज रही है खिल रही हिना
वादियों में गुनगुना रहा ये प्यार है

चाँद की शरारतों का हो रहा असर
बिन पिए नशा है छा रहा ख़ुमार है

तू ही तू है, तू ही तू है, तू ही हर कहीं
जिस्मों जाँ पे अब तेरा ही इख्तियार है

हर कली, नदी, फिजाँ, बहार कह रही
कायनात का ये कौन चित्रकार है