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मंगलवार, 6 मई 2014

दो जमा दो पाँच जब होने लगे ...

दो जमा दो पाँच जब होने लगे
अंक अपने मायने खोने लगे

कौन रखवाली करेगा घर कि जब
बेच के घोड़े सभी सोने लगे

मुश्किलों का क्या करोगे सामना
चोट से पहले ही जो रोने लगे

फैलती है सत्य की खुशबू सदा
झूठ का फिर बोझ क्यों ढोने लगे

खुद की गर्दन सामने आ जायेगी
खून से ख़ंजर अगर धोने लगे

ये फसल भी तुम ही काटोगे कभी
दुश्मनी के बीज जो बोने लगे