आइना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आइना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

इस शहर की शांति तो भंग है ...

नाम पर पूजा के ये हुड़दंग है
इस शहर की शांति तो भंग है

लूटता है आस्था के नाम पर 
अब कमाने का निराला ढंग है

हर कोई आठों पहर है भागता  
जिंदगी जैसे के कोई जंग है

घर का दरवाज़ा तो चौड़ा है बहुत
दिल का दरवाज़ा अगरचे तंग है

आइना काहे उसे दिखलाए हैं
उड़ गया चेहरे का देखो रंग है

युद्ध अपना खुद ही लड़ते हैं सभी
जिंदगी में कौन किसके संग है

रविवार, 26 जुलाई 2015

चुभते हैं इस कदर से तेरी याद के नश्तर ...

जो लोग आज खून मिटाने नहीं देते
रस्ता वही तो मिल के बनाने नहीं देते

कुछ लोग जो गुनाह की खेती के हैं माहिर
इंसानियत की फसल उगाने नहीं देते

जागीर आसमां को समझने लगे अपनी
परवाज़ पंछियों को लगाने नहीं देते

करते हैं सच के साथ की तो पैरवी अक्सर
पर आईने को सच भी दिखाने नहीं देते

खुद दोस्ती की आड़ में हैं घौंपते खंजर
पर दुश्मनों से हाथ मिलाने नहीं देते

जो तीरगी की कैद में रहने के हैं आदी
घर जुगनुओं को रात में आने नहीं देते

चुभते हैं इस कदर से तेरी याद के नश्तर
नाकाम दौरे-इश्क भुलाने नहीं देते