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मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

मील के पत्थर कभी इस रह-गुज़र के देखना ...

मील के पत्थर कभी इस रह-गुज़र के देखना
लोग मिल जाएंगे फिर मेरे शहर के देखना

दूर तक तन्हा मिलेगी रेत रेगिस्तान की
फल मगर मीठे मिलेंगे इस शजर के देखना

चुट्कियों में नाप लोगे प्रेम की गहराई तुम
मन के गहरे ताल में पहले उतर के देखना

पल दो पल में देख लोगे आदमी का सच सभी
दिल को पहले आईने सा साफ़ कर के देखना

इश्क के खिलने लगेंगे फूल पीली रेत पर
प्रेम के सहरा में पहले खुद उतर के देखना

प्रेम के आकाश पर बस कृष्ण है औ कृष्ण है
वेदना में विरह की राधा निखर के देखना