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रविवार, 5 अप्रैल 2015

विचार ...

तपस्या जरूरी है सृजन के लिए और क्रांति के लिए ... विचार ... एक ऐसा विचार जो लेता रहे सांस दिल के किसी कोने में ... सतत सुलगने की आकांक्षा लिए ... आग जैसे धधकने की चाहत लिए ... महामारी सा फ़ैल जाने की उन्माद लिए ...

उधार के शब्दों से
विप्लव नहीं आता
परिवर्तन की लहर
आग के दरिया से उठनी जरूरी है

कुंद विचार
दासता की बेड़ी नहीं काट पाते
चासनी में डूबी लेखनी
गहरे अर्थ नहीं लिख पाती

क्रांति लिखने को
जरूरी है स्याही का लाल होना
कलम का तलवार होना
कागज़ के बदले
सख्त सीने की चट्टान होना

तब कहीं जाकर धरती की कोख से
अंगार के बीज पनपते हैं

निर्माण की प्रक्रिया
प्रसव पीड़ा से कम नहीं