शुक्रवार, 29 दिसंबर 2006

देश से दूर दिवाली की एक रात

दिया जलेगा या बाती या तेल जलेगा
या मेरा दिल कोने मैं चुपचाप जलेगा

इस बार दिवाली पर न जाने कौन जलेगा

रंगोली जब मेरे आँगन सज जाएगी
लक्ष्मी मेरे द्वारे आ कर रुक जाएगी
मैं तो हूँ परदेस में टीका कौन करेगा

इस बार दिवाली पर.............................

खुशियाँ तो आएँगी मेरे दरवाजे भी
गूंजेंगे घर मैं मेरे गाजे-बाजे भी
मेरे घर पर गणपति पूजन कौन करेगा

इस बार दिवाली पर.............................

बैठी होगी कहीं ढूँढ कर के वो कोना
उसका होगा दिल जाने कितना सूना
देस में उसकी रीती गागर कौन भरेगा

इस बार दिवाली पर............................

बुधवार, 27 दिसंबर 2006

स्वप्न

स्वप्न मेरे कुछ भूले बिसरे
कागज को तरसे बरसों