बुधवार, 27 दिसंबर 2006

स्वप्न

स्वप्न मेरे कुछ भूले बिसरे
कागज को तरसे बरसों

2 टिप्‍पणियां:

  1. स्वप्न मेरे जो कभी न बिसरे
    सच होने को हर पल तरसे !

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  2. बहुत सुन्दर सर..
    आपकी पहली पोस्ट भी लाजवाब थी..
    सादर.

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