शनिवार, 13 सितंबर 2008

धुँधला गया है चाँद

चोह्दवीं की रात है और घुप्प अंधेरा
कायनात में मेरी बदला गया है चाँद

तुम अचानक आ गयी हो रात के दूजे पहर
देख कर चेहरा तेरा पगला गया है चाँद

तेरे माथे पर सिमट आया है जीवन
सुर्ख़ पा वन चांदनी पिघला गया है चाँद

पलकें झुकाए थाल पूजा का उठाये
रूप सादगी भरा नहला गया है चाँद

देर तक करता था मैं दादी से बातें
उम्र का है असर या धुँधला गया है चाँद

13 टिप्‍पणियां:

  1. देर तक करता था मैं दादी से बातें
    उम्र का है असर या धुँधला गया है चाँद
    bahut sunder ...

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  2. आहा!!
    "हर शेर बयाने खुबसूरत की अमासिल हैं,
    हर शेर रु-ए-खुद सा उजला गया है चाँद"

    (गुस्ताखी माफ़ सर...)
    बहुत बेहतरीन... आनंद आ गया...
    सादर...

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  3. बहुत ही खूबसूरत गज़ल है ! जिसे देख कर चाँद भी पगला जाये उसका दीदार कितना बेमिसाल होगा ! बहुत खूब !

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  4. तेरे माथे पर सिमट आया है जीवन
    सुर्ख़ पा वन चांदनी पिघला गया है चाँद

    लाजवाब लिखे हैं सर!

    सादर

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  5. चाँद तो है ही ऐसा.....ऐसाइच होता है यह चाँद.
    पर..... जिस रूप में बुलाओ आ जाता है.दादी जरूर दिखती होगी उसके किसी रूप में.
    कितनी मुश्किल से मिले हैं आप. सब बुकमार्क डिलीट हो गये थे.
    थेंक्स इस चाँद को जैसे धीरे धीरे बादलों से निकल आया.बोला-'मैं यहाँ हूँ इंदु ! तु भी तो चाँद है मेरी तरह.आ देख बाबु ने एक कविता लिखी है और.......उसमे चाँद का ज़िक्र है चाँद सी दादी का.
    अच्छा लगा पढकर.यूँ किसी ने याद न किया होगा अपने पापा की मम्मी को'
    मैंने कहा-'चाँद! यह रचनाकार कुछ अलग सा है.न शब्दों से खेलने वाला शब्दों का खिलाड़ी है, न शब्दों
    को रंगने वाला कलाकार.अपनी रचना के हर शब्द में में बस खुद होता है.'

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  6. तुम अचानक आ गयी हो रात के दूजे पहर
    देख कर चेहरा तेरा पगला गया है चाँद

    wah !!!

    Bahut khub sirji

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  7. बहुत ही खूबसूरत गजल लिखी है आपने मजा आ गया।

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  8. चाँद आपका संगीता जी की हलचल पर है खिला
    पोस्ट पढकर आपकी बहुत आनंद मुझको मिला.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार जी.

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  9. चाँद धुँधला लगने का कारण है.उचित ही है !

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  10. धुंधलके में भी,आपकी गज़ल का
    चांद चमक रहा है.

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. धुँधले चाँद की ख़ूबसूरती देखने लायक होती है. सुंदर ग़ज़ल.

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