शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008

ज़िंदगी का गीत

ज़िंदगी का रंग हो वो गीत गाना चाहिए
यूँ कोई भी गीत नही गुन-गुनाना चाहिए


शहर पूरा जग-मगाता है चरागों से मगर
स्याह मोड़ पर कोई दीपक जलाना चाहिए


दोस्तों की दोस्ती पर नाज तो करिये मगर
दुश्मनों को देख कर भी मुस्कुराना चाहिए


मंज़िलें को पा ही लेते हैं तमाम राहबर
रास्ते के पत्थरों को भी उठाना चाहिए


चाँद की गली मैं सूरज खो गया अभी अभी
आज रात जुगनुओं को टिम-टिमाना चाहिए


आदमी और आदमी के बीच का ये फांसला
सुलगती सी आग है उसको बुझाना चाहिए

5 टिप्‍पणियां:

  1. मंज़िलें को पा ही लेते हैं तमाम राहबर
    रास्ते के पत्थरों को भी उठाना चाहिए
    बहुत गंभीर भाव शब्दों का सहज प्रवाह

    सुखमय अरु समृद्ध हो जीवन स्वर्णिम प्रकाश से भरा रहे
    दीपावली का पर्व है पावन अविरल सुख सरिता सदा बहे

    दीपावली की अनंत बधाइयां
    प्रदीप मानोरिया

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  2. दोस्तों की दोस्ती पर नाज तो करिये मगर
    दुश्मनों को देख कर भी मुस्कुराना चाहिए
    *******
    चाँद की गली मैं सूरज खो गया अभी अभी
    आज रात जुगनुओं को टिम-टिमाना चाहिए

    ..........
    Kya kahen????? bahut bahut sundar.Aaapka blog maine add kar liya hai ab hamesha padha karungi.Aise hi likhte rahen.Shubhkaamnayen.

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  3. दोस्तों की दोस्ती पर नाज तो करिये मगर
    दुश्मनों को देख कर भी मुस्कुराना चाहिए
    मुक्कमल शेर गज़ल भी पूरी है

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