शुक्रवार, 14 नवंबर 2008

हादसा

कल सुबह ही हादसा ये हो गया
चाँद सूरज की गली में खो गया

इतिहास ने रोका बहुत इंसान को
समय की रफ्तार में वो सो गया

जो धड़कता था मेरे सीने में हरदम
वो मेरा दिल पत्थरों का हो गया

गाँव की पग-डंडियाँ हैं ढूंढती
लौट कर आया नही फ़िर जो गया

कुछ सिसकते ख्वाब उसके साथ थे
अपना घर छोड़ कर जब वो गया

ज़ुल्म का जिसके नही कोई हिसाब
पैसे के बल वो पाप सारे धो गया

9 टिप्‍पणियां:

  1. गाँव की पग-डंडियाँ हैं ढूंढती
    लौट कर आया नही फ़िर जो गया

    कुछ सिसकते ख्वाब उसके साथ थे
    अपना घर छोड़ कर जब वो गया

    --अब क्या कहें..अपनी ही दास्तां लगती है!! बहुत ही उम्दा!!

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  2. इतिहास ने रोका बहूत इंसान को
    समय की रफ्तार में वो सो गया

    जो धड़कता था मेरे सीने में हरदम
    वो मेरा दिल पत्थरों का हो गया
    " hadse ke bhut sacche or sunder tasveer, jindge ke bhut kareeb jaise..."

    regards

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  3. गाँव की पग-डंडियाँ हैं ढूंढती
    लौट कर आया नही फ़िर जो गया

    कुछ सिसकते ख्वाब उसके साथ थे
    अपना घर छोड़ कर जब वो गया
    achha khayal.Achhi Gazal magar grammatical mistake hain sudhar le to bahut achha ho jayega

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  4. very nice post ji

    keep it up


    Shyari Is Here Visit Jauru Karo Ji

    http://www.discobhangra.com/shayari/sad-shayri/

    Etc...........

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  5. जो धड़कता था मेरे सीने में हरदम
    वो मेरा दिल पत्थरों का हो गया
    subhan allah !

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  6. दिगम्बर भाई,

    ज़ुल्म का जिसके नही कोई हिसाब
    पैसे के बल वो पाप सारे धो गया

    बहुत अच्छी प्रस्तुति। बधाई। कहते हैं-

    पैसा अगर हो पास तो कोई दिक्कत नहीं बड़ी।
    कतिल भी बाद कत्ल के हो जाते हैं बरी।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  7. बाप रे बाप....रब्बा मेरे रब्बा....मौला मेरे मौला....हाय माँ कित्ता...कित्ता...कित्ता अच्छा लिखते हो आप.....

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  8. बहुत खूब आपने अपने विचारों को सुंदर तरीके से व्यक्त किया है आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है

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  9. जो धड़कता था मेरे सीने में हरदम
    वो मेरा दिल पत्थरों का हो गया


    बहुत खूब

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है