बुधवार, 15 अप्रैल 2009

मन में एक अंश भी बजरंग नही

आप नही जिंदगी में रंग नही,
रस नही, खुशी नही, उमंग नही,

आज हैं रूठे तो कल साथ होंगे,
दोस्ती की बात है कोई जंग नही,

प्यार के धागों से बँधा है बंधन,
कट गयी जो डोर तो पतंग नही,

खून के धब्बे हैं वो इंसानियत के,
फर्श पर बिखरा था लाल रंग नही,

इस शहर के रास्ते चौड़े हैं बहुत,
गाँव की पगडंडियाँ भी तंग नही,

राम के आदर्श तो बस नाम के,
मन में एक अंश भी बजरंग नही,

मौत से आगे का सफ़र है यारो,
तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,

25 टिप्‍पणियां:

  1. प्यार के धागों से बँधा है बंधन,
    कट गयी जो डोर तो पतंग नही,

    खून के धब्बे हैं वो इंसानियत के,
    फर्श पर बिखरा था लाल रंग नही,

    waah aaj to kuch tikha andaaz liye gazal,satik sach bhi to hai yahi magar.bahut hi shandaar.ram ke bhakt aur bajrang ka ansh tak mann mein nahi.kya kehne.lajawab

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  2. 'मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,'

    -शाश्वत सत्य

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  3. "राम के आदर्श तो बस नाम के,
    मन में एक अंश भी बजरंग नही,

    मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही"

    बहुत बढिया......सत्य का आभास कराती हुई लाजवाब रचना.....आभार

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  4. प्यार के धागों से बँधा है बंधन,
    कट गयी जो डोर तो पतंग नही,

    मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही"

    -बहुत सुन्दर ग़ज़ल है.
    वास्तविक जीवन से लिए गए ख्याल हैं दार्शनिकता लिए हुए.

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  5. bahot hi badhiya gazal kahi hai aapne dhero badhaayee kubul karen...


    arsh

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  6. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही

    अंतिम सत्य.

    रामराम.

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  7. सत्य से रूबरू करवाती हुई रचना
    राम के आदर्श तो बस नाम के,
    मन में एक अंश भी बजरंग नही,
    मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,

    समय और समाज के हिसाब से लिखी गयी है . सोचो साथ क्या जायेगा !

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  8. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,

    behatareen rachna, har sher haseen, badhai sweekaren.

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  9. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,

    behatareen rachna, har sher haseen, badhai sweekaren.

    जवाब देंहटाएं
  10. आज हैं रूठे तो कल साथ होंगे,
    दोस्ती की बात है कोई जंग नही,
    बेहद खूबसूरत रचना आपने लिखी है । पूरी रचना पढ़ने के बाद यह कह सकता हू कि आपने बिल्कुल यर्थाथ को दर्शाने का काम किया है । हकीकत भी यही है जो आपने लिखा है शुक्रिया

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  11. इस शहर के रास्ते चौड़े हैं बहुत,
    गाँव की पगडंडियाँ भी तंग नही

    ....बहुत खूब दिगम्बर जी !!!

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  12. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,
    बहुत बढ़िया गजल ..दिगंबर जी ....इसमें तो धर्म ..दर्शन सभी कुछ है
    हेमंत कुमार

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  13. भावों से भरपूर सुन्दर शायरी के लिए
    एक ही शब्द है।
    बधाई।

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  14. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,
    आदरणीय दिगंबर सर,
    आपकी गजल बहुत बढ़िया लगी .....इसमें एक दर्शन भी है......शुभकामनाएँ
    मैने अपनी एक कहानी झरोखा पर प्रकाशित की है ....आपके बहुमूल्य सुझाव उसपर आमंत्रित हैं .....
    नेहा शेफाली

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  15. दिगंबर जी ,'रेत का तकिया' पर आपकी टिप्पणी सारगर्भित लगी.. आपने सही कहा ...इन्ही भावो ने कहानी पूरी करने की हिम्मत दी थी....देवडा गाँव में एक सौ दस वर्ष में पहली बारात आने की खबर अखबारों की सुर्खियाँ बनी थी...पर तब यह सामान्य सा प्रश्न अनुत्तरित ही रहा कि एक गाँव में एक सौ दस वर्षो में एक भी बेटी जिन्दा न रहने का क्या कारण था?....सर,आशा करता हूँ आपका मार्गदर्शन बना रहेगा...

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  16. राम के आदर्श तो बस नाम के,
    मन में एक अंश भी बजरंग नही,


    HAMESHA KI TARAH....

    ...JITNE ACCHE AAP!
    UTNE ACCHE APKE VICHAAR...
    JANTE HAIN MAIN APNI TIPPANI SABE ANT MAIN YA BAHUT LATE KYUN DETA HOON...
    KEWAL ISLIYEA KI MAIN APKI GHAZAL BAAR BAAR PADH SAKAUN...

    PEHLI BAAR AATA HOON...
    TIPPANI DETE KE LIYE JAISE HI CLICK KARE KI SOCHTA HOON...
    APNE SE KEJHTA HOON NAHI YAAR !! ABHI NAHI !! KYA PATA AGLI BAAR KOI AUR SHER PASAND AA JAIAE( KYUNKI AAP TO JANTE HAI KI ADMI KA MOOD BADLTE REHTA HAI) GHAZAL KI TARAH. HAR MISRA ALAG...
    ...LEKIN APNE AAP MEIN POORA....

    ...GHAR KI YAAD AATI HAI TO:
    इस शहर के रास्ते चौड़े हैं बहुत,
    गाँव की पगडंडियाँ भी तंग नही,

    HOSTEL KI YAAD AATI HAI TO:
    आज हैं रूठे तो कल साथ होंगे,
    दोस्ती की बात है कोई जंग नही,

    AAJ KE HALAT DEKHTE HAIN TO:
    खून के धब्बे हैं वो इंसानियत के,
    फर्श पर बिखरा था लाल रंग नही,

    AADARSHON KI DESH KI RAJNITI KI BAAT HO TO:
    राम के आदर्श तो बस नाम के,
    मन में एक अंश भी बजरंग नही,


    AUR JAB DARU PEEKE FILSOHPICAL HOTE HAIN TO:
    मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,

    BILKUL APKE GHAZAL KI TARAH HAIN ZINDAGI KE FALSAFE.....

    ...BAHUT BADIYA YA BADHAI NAHI KAHOONG ABKI BAAR !!
    KYUNKI ACCHA LIKHNA TO APKI AADAT MAIN SHUMMAR HO GAYA HAI...

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  17. ... दिल को छूने वाली बेहद प्रभावशाली व प्रसंशनीय रचना/गजल है, शुभकामनाएँ।

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  18. खूबसूरत रचना दिगम्बर भाई।

    जब देखा मैं इस रचना को फिर लिखने की चाह बनी।
    काश अगर मैं भी लिख पाता पर लिखने का ढ़ंग नहीं

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  19. आज हैं रूठे तो कल साथ होंगे,
    दोस्ती की बात है कोई जंग नही,

    वाह....दोस्ती को कितनी गहराई से नापा है आपने.....!!

    खून के धब्बे हैं वो इंसानियत के,
    फर्श पर बिखरा था लाल रंग नही,

    वाह...वाह...बहुत खूब.....!!

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  20. 'मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,'

    कितना सच्चा .कितना सटीक ,कितना अर्थपूर्ण !!!

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  21. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही


    --वाह दिगम्बर!! बेहतरीन सजाई है यह गज़ल!! आनन्द आ गया.

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  22. बहुत सुन्दर ग़ज़ल दिगम्बर भाई,आनन्द आ गया.

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  23. मौत से आगे का सफ़र है यारो,
    तन्हा चलो कोई किसी के संग नही,

    Man ko chu gayi..

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