रविवार, 3 मई 2009

कुछ लम्हे...........

१)

जब शब्द गूंगे हो जाएँ
नज़र कुछ बोल न सके
यादों के दरख्त से टूटे लम्हे
वक़्त के साथ ठहर जाएँ
तुम चुपके से मुस्कुरा देना
हवा चल पड़ेगी.....

२)

जब सांझ की लाली
मेरे आँगन में उतर आएगी
वक़्त कुछ पल के लिए
ठिठक जायेगा
तुम्हें जब शाम की सिन्दूरी
छू रही होगी
मैं इक टीका चुरा लूँगा
तेरे सुर्ख होठों से.....

३)

सुबह रात का किवाड़
खटखटाती है
तारों की छाँव में बैठे चांदनी
मुस्कुराती है
ऐ रात की स्याही
कुछ देर ठहर जाना
आज उनसे पहली मुलाक़ात है
कहीं सपना टूट न जाए.....

30 टिप्‍पणियां:

  1. तीनो ही रचनाएँ खूब से खूब है ... कितनी nazuki
    से लिखी है आपने... ढेरो बधाई...

    अर्श

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  2. सुबह रात का किवाड़
    खटखटाती है
    तारों की छाँव में बैठे चांदनी
    मुस्कुराती है
    ऐ रात की स्याही
    कुछ देर ठहर जाना
    आज उनसे पहली मुलाक़ात है
    कहीं सपना टूट न जाए.....

    wah , bahut khoob teenon hi rachnaayen behatareen.

    नयन से अश्रु झरे जब,
    तब ह्रदय से गीत फूटा,
    लय स्वयं ही बन गई जब
    चांदनी में स्वप्न टूटा.

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  3. mera to dil bhi waah waah kar raha hai ...sabhi ki sabhi rachnayein behtreen hain ...mohabbat mein doobi hui

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  4. दिगंबर जी ,

    आपकी तीनों क्षणीकाएं लाजवाब हैं ....किसकी तारीफ करूँ और किसकी न करूँ.....??

    जब शब्द गूंगे हो जाएँ
    नज़र कुछ बोल न सके
    यादों के दरख्त से टूटे लम्हे
    वक़्त के साथ ठहर जाएँ
    तुम चुपके से मुस्कुरा देना
    हवा चल पड़ेगी.....

    बहुत सुंदर ....!!

    तुम्हें जब शाम की सिन्दूरी
    छू रही होगी
    मैं इक टीका चुरा लूँगा
    तेरे तुम्हें जब शाम की सिन्दूरी
    छू रही होगी
    मैं इक टीका चुरा लूँगा
    तेरे सुर्ख होठों से.....


    टीका ...वो भी सुर्ख होठों से.....वाह...!!

    ऐ रात की स्याही
    कुछ देर ठहर जाना
    आज उनसे पहली मुलाक़ात है
    कहीं सपना टूट न जाए.....

    लाजवाब.......!!

    आपको बहुत बहुत बधाई इस सुंदर प्रस्तुति के लिए.....!!

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  5. तीनो लघु कवितायेँ पसंद आयीं ख़ास कर पहली वाली.

    जब शब्द गूंगे हो जाएँ
    नज़र कुछ बोल न सके
    यादों के दरख्त से टूटे लम्हे
    वक़्त के साथ ठहर जाएँ
    तुम चुपके से मुस्कुरा देना
    हवा चल पड़ेगी.....

    -बहुत ही प्यारा सा अहसास लिए हुए.

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  6. तीनो बेहद रूमानी है ..मीठे एहसास और प्यार समेटे हुए ..

    तुम चुपके से मुस्कुरा देना
    हवा चल पड़ेगी.....

    बहुत खूब ...

    तुम्हें जब शाम की सिन्दूरी
    छू रही होगी
    मैं इक टीका चुरा लूँगा
    तेरे सुर्ख होठों से.....

    यही प्यार का मीठा एहसास है ..

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  7. सुबह रात का किवाड़
    खटखटाती है
    तारों की छाँव में बैठे चांदनी
    मुस्कुराती है
    ऐ रात की स्याही
    कुछ देर ठहर जाना
    आज उनसे पहली मुलाक़ात है
    कहीं सपना टूट न जाए.....

    दिगंबर जी ,
    बहुत सुन्दर कल्पना ,बेहतरीन अभिव्यक्ति के साथ .अच्छी लगी तीनों रचनाएँ .
    हेमंत कुमार

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  8. बहुत ही लाजवाब रचनाएं शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  9. दिगम्बर भाई, क्या बात है? एक रचना में इतने रंग? वाह।

    नजर बे-जुवाँ और जुवाँ बे-नजर है।
    इशारों को समझो तो होता असर है।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  10. तुम चुपके से मुस्करा देना
    हवा चल पड़ेगी......

    बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति ....
    सुकोमल एहसास की नाज़ुक तर्जुमानी
    और...आपकी हौसला-अफजाई का बेहद शुक्रिया

    ---मुफलिस---

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  11. तीनों ही क्षणिकाऎं बहुत बढिया.....बेहतरीन.

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  12. सुंदर कल्‍पना.... तीनों बेलाओं को सहेजता हुआ।

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  13. पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ है और सपनीले ब्लॉग को पढ़ने का मौका मिला...
    1. हम भी मूक मौन हैं
    2. कुछ पल ठिठक गए
    3. पहली मुलाकात खूब रही..

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  14. तपते रेगिस्तान मे शीतलता का एहसास कराती बेहद खूबसूरत रचनायें। बहुत बहुत बधाई आपको।

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  15. वाह दिगम्बर जी...
    क्या खूब तीनों अलग-अलग रंग निखरते हुये अपने-अपने अंदाज़ में लेकिन तुम चुपके से मुस्कुरा देना, हवा चल पड़ेगी का जवाब नहीं

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  16. जब शब्द गूंगे हो जाएँ
    नज़र कुछ बोल न सके
    यादों के दरख्त से टूटे लम्हे
    वक़्त के साथ ठहर जाएँ
    तुम चुपके से मुस्कुरा देना
    हवा चल पड़ेगी.....



    -गज़ब कर दिया भाई...तीनों एक से बढ़कर एक. जबरदस्त!!

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  17. तीनों बेहतरीन... पर पहली का जवाब नहीं... वाह.. दिगंबर जी वाह..

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  18. वाह क्या बात है .
    अति सुन्दर ..दिलकश

    जब शब्द गूंगे हो जाएँ
    नज़र कुछ बोल न सके
    यादों के दरख्त से टूटे लम्हे
    वक़्त के साथ ठहर जाएँ
    तुम चुपके से मुस्कुरा देना
    हवा चल पड़ेगी.....

    जवाब देंहटाएं
  19. bahut pyari kavita he, isme apni ek shoukhmizazi he, sarsta he, komalta he...wah, mazaa aa gaya, esi kavitaye ab jyada likhi bhi to nahi jaa rahi/ kher aap jese kavita ki komlta ko sambhale rakhne vale moujud he, lihaza kavita ko kisi baat kaa bhay nahi/
    har ek shbd masumiyat se chhute he/
    यादों के दरख्त से टूटे लम्हे
    वक़्त के साथ ठहर जाएँ
    तुम चुपके से मुस्कुरा देना
    हवा चल पड़ेगी.....
    kyaa baat likhi he gigambarji, ynha haalanki do chije ek he kintu ek hone ke baad bhi dono ke arth bhinnata liye hue he, yahi khasiyat he aapki kavitao ki,,
    LAMHE aour VAQT/ ek shan eh to dusra samay he/ he dono ek hi biradari ke kintu WAH kya jabardast pryog kiya he aapne, mananaa padhhega/
    जब सांझ की लाली
    मेरे आँगन में उतर आएगी
    वक़्त कुछ पल के लिए
    ठिठक जायेगा
    तुम्हें जब शाम की सिन्दूरी ...

    LALI aour sindur,,,aour fir surkh hotho se teeka churana...kya baat likhi he////sach me janaab, me to is kavita ka kaayal ho gayaa/
    सुबह रात का किवाड़
    खटखटाती है
    तारों की छाँव में बैठे चांदनी
    मुस्कुराती है
    ऐ रात की स्याही
    कुछ देर ठहर जाना
    ynha ke is pryog ne shbdo me meethaas gholi he, taaro ki chhav me chandni..fir uska muskurana..aour isme raat ki syahi...
    amooman jab taare timtima rahe ho chandni bhi ho to syaah raat nahi kahi jaati kintu jis andaaz ko aapne pakda he usne vakai kamaal kar diya//

    MAZAA AA GAYA digambarji///

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  20. मैं इक टीका चुरा लूँगा
    तेरे सुर्ख होठों से.....
    ...wah wah wah...
    ...is line ne to dil chura liya !! bahut hi gehra arth hai iska, ya fir maine nikal liya(hahaha)...
    ..jo bhi ho , waise to teeno poem acchi hain par upar wali line ki jtni taarif karoon kum...)

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  21. ... बहुत ही सुन्दर रचनाएँ है, दिल को छू लिया, तारीफ....तारीफ...तारीफ ।

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  22. भाई दिगम्बर नासवा जी।
    तीनों शब्द-चित्र उच्च-कोटि के हैं।
    बधाई।

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  23. मैंने एक टीका चुरा लूंगा,,,,
    और हवा चल पड़ेगी,,,,

    अपने तो दिल के सबसे करीब यही हैं दोनों,,वो अलग बात है के तीनों रचनाओं का हर शब्द सुंदर है,,

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  24. आज उनसे पहली मुलाक़ात है
    कहीं सपना टूट न जाए.....

    तीनो लघु कवितायेँ पसंद आयीं

    सपना टूटने न देगें,

    बधाई सन्देश के साथ हमारी प्रतिक्रिया स्वीकार करें

    चन्द्र मोहन गुप्त

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  25. लघु कवितायेँ पसंद आयीं .तीनों बेहतरीन है..

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  26. बेहतरीन ..

    ये टीका चुराने का गुर बहुत अच्छा लगा

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  27. aapke blog par pahli baar aayi hun aur aisa lag raha hai jaise kisi ne dil ko jakad liya ho.........bahut hi shandar hai har prastuti.........prashansa ke liye shabd kam lagte hain.

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  28. बहुत ही सुन्दर रचनाएँ है, दिल को छू लिया, तारीफ....तारीफ...तारीफ ।

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है