शनिवार, 23 मई 2009

बोलते लम्हे ......

१)

अक्सर देखा है तुझे
खुले आसमान के नीचे
हथेली में सजाते बारिश की रिमझिम बूँदें.......
तेरे ख़्वाबों से झिलमिलाती
तेरे एहसास से भीगी वो बूँदें
पलकों पर सजा लूँगा
धीरे धीरे देखूंगा.............
पूरा होता तेरा ख्वाब........

२)

गीले बालों से टपकती बूँदें
सख्त खुरदरी हथेली पर
जैसे सफ़ेद मोती
गिर रहे हों ज़मीं पर
कोंपलें सरसों की
धीरे धीरे उग रही हैं
बसंत होता मौसम
छेड़ देता है मन के तार
नाच उठता है मन मयूर......
शायद किसी मासूम एहसास ने
करवट बदली है आज .........

३)

चिडियों का चहचहाना
बरखा का टिप टिपाना
पवन का खिल खिलाना
सूखे पत्तों की सरसराहट
तेरे चेहरे की मुस्कराहट
फिर तेरे आने की आहट
वो देखो...
श्रृष्टि ने अभी अभी ...
मेरी कविता का सृजन किया ...

28 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khoobsurat rachnayein hain
    inhein padhkar dil khush ho gaya

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  2. teeno rachana bahut hi lajawab,chidiyon ki chehkan se sunder.

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  3. shayad kisi masoom ehsaas ne karvat badli hai aaj.

    wah. digambarji, teenon hi rachnaayen, masoom ehsaas se bharpoor. badhai sweekaren.

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  4. बहुत ही सुंदर और लाजवाब रचनाएं

    रामराम.

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  5. जैसे सफ़ेद मोती
    गिर रहे हों ज़मीं पर
    ... प्रभावशाली अभिव्यक्ति ... सुन्दर रचनाएँ ... बधाईयाँ ।

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  6. चिडियों का चहचहाना
    बरखा का टिप टिपाना
    पवन का खिल खिलाना
    सूखे पत्तों की सरसराहट
    तेरे चेहरे की मुस्कराहट
    फिर तेरे आने की आहट
    वो देखो...
    श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया ...
    bhut khubsurat bhavabhivykti.mano barkha ki bunde mere hi aaganme barsi ho.

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  7. वो देखो...
    श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया ...
    --------------------
    'शायद किसी मासूम एहसास ने
    करवट बदली है आज .........

    -बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ!

    -तीनो रचनाएँ ही भावों के मोती को सुन्दर अहसासों में पिरोये हुए जैसी लग रही हैं.

    -सुन्दर अभिव्यक्ति

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  8. अहा!! तीन की तीनों..अह्हा!!

    बहुत खूब महाराज..कहाँ रहे अभी तक!!

    बधाई घणी सारी.

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  9. दिगम्बर जी,
    प्रीत के फिर इन रंगों की बौछारें जो हम पार आप ने डाली हैं, आह!....धन्य हुये!

    श्रृष्टि ने अभी-अभी मेरी कविता का सृजन किया ... कहने वाले इस बेमिसाल कवि को नमन

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  10. छोटे छोटे लम्हों में ही जीवन का आनंद छुपा रहता है ,बड़े की खोज में अक्सर हम इससे वंचित रह जाते हैं ! इन लम्हों में जीवन रस तलाशती आपकी रचनाएँ एक सुखद एहसास करा जाती है !

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  11. prakrti hi to srajankarta he//
    digambarji, sach poochhiye to shbdo ke saath aapki jo dosti lag rahi he vakai, shandaar/ behad maasumiyat he aour shbdo ki dhaar itni nirmal ki bs ham jese rasik log isase ubarna hi nahi chahte//
    bemisal/

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  12. लम्हे बोल रहे हैं सब कुछ सुन्दर है एहसास।
    श्रृष्टि ने ही सृजन किया जब कविता बिल्कुल खास।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.

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  13. तेरे ख़्वाबों से झिलमिलाती
    तेरे एहसास से भीगी वो बूँदें
    पलकों पर सजा लूँगा
    धीरे धीरे देखूंगा.............
    पूरा होता तेरा ख्वाब........khab ankho me sjaye rakhe jarur pure hote hai....

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  14. चिडियों का चहचहाना
    बरखा का टिप टिपाना
    पवन का खिल खिलाना
    सूखे पत्तों की सरसराहट
    तेरे चेहरे की मुस्कराहट
    फिर तेरे आने की आहट
    वो देखो...
    श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया ...

    भई वाह्! दिगम्बर जी, कितनी खूबसूरती से अपने भावों को इन शब्दों में समेटा है.

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  15. "श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया ... "

    ab jaan gaye digambar ji aapki itni acchi acchi kavitoon ka prerna kshrot kya hai?

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  16. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  17. आपने शब्द-चित्रों के माध्यम से मनोभावों को सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है।
    बधाई।

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  18. तीनों ही बहुत सुन्दर और अदभुत लगी ..वो देखो...
    श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया ... bahut khub ...

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  19. ...हथेली में सजाते बारिश की रिमझिम बूँदें.......
    तेरे ख़्वाबों से झिलमिलाती
    तेरे एहसास से भीगी वो बूँदें ...

    वाह!!! भावनाओं का कितना सजीव चित्रण किया है आप ने... और कितनी संजीदगी है इन लाइनों में.. सचमुच मजा आ गया. दिगंबर जी. मैंने 'Swapn Mere' ko join कर लिया है.

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  20. क्या कहूँ इसके सिवाय.....बस

    वाह ! वाह ! वाह !

    एक से बढ़ कर एक बेहतरीन रचनाये...
    आनंद आ गया पढ़कर....लाजवाब !!वाह!!

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  21. गीले बालों से टपकती बूँदें
    सख्त खुरदरी हथेली पर

    वो देखो...
    श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया

    kamaal kamaal ki lines hai...

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  22. तीनो शब्द चित्र कमाल के लिखे हैं आपने...बहुत बहुत बधाई...
    नीरज

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  23. पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ कि आपको मेरी शायरी पसंद आई !
    बहुत ही ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!

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  24. saari dunia, aapko jaanti hai
    pata nahi, main kaise peechhe rah gaya. Anyway thanks for coming on my blog and providing your address.

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  25. गीले बालों से टपकती बूँदें
    सख्त खुरदरी हथेली पर
    जैसे सफ़ेद मोती
    गिर रहे हों ज़मीं पर
    कोंपलें सरसों की
    धीरे धीरे उग रही हैं
    बसंत होता मौसम
    छेड़ देता है मन के तार
    नाच उठता है मन मयूर......
    शायद किसी मासूम एहसास ने
    करवट बदली है आज .


    sirf ek hi rachanaa nahi balki aapki har ek rachanaa ship ke moti ke samaan hai

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  26. नासवा जी ,आज आपके ब्लॉग पर आई तो नई पुरानी सारी पोस्ट पढ़ डालीं .सचमुच मन के कोमल अहसासों को कितने सुन्दर ढंग से व्यक्त करते हैं आप
    क्यूँ न नीले आसमान की चादर पर सजे,
    बादल के सफ़ेद फूल,
    फूंक मार कर उड़ा दूं........
    या हलके से गुदगुदी कर,
    तुझे हंसा दूं.......
    बादलों के बदलते रूप में,
    तेरा उदास चेहरा,
    अच्छा नहीं लगता........
    जब तू खिलखिला कर हंस पड़ेगी,
    ये हवा चल पड़ेगी,
    बहुत सुन्दर है. सभी रचनाएँ पसंद आई .बधाई और shubhkamnayen के आपकी भावनाओं में ये कोमलता बनी रहे

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  27. 'चिडियों का चहचहाना
    बरखा का टिप टिपाना
    पवन का खिल खिलाना
    सूखे पत्तों की सरसराहट
    तेरे चेहरे की मुस्कराहट
    फिर तेरे आने की आहट
    वो देखो...
    श्रृष्टि ने अभी अभी ...
    मेरी कविता का सृजन किया ... '

    - सुन्दर

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  28. आपकी कविता में जबरदस्त आकर्षण होता है।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है