गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

गुबार

कुछ अनसुलझे सवाल
कुछ हसीन लम्हे
जिस्म में उगी
आवारा ख्वाबों की
भटकती नागफनी

कितना कुछ
एक ही साँस में कहने को
भटकते शब्द

डिक्शनरी के पन्नों की
फड़फड़ाहट के बीच
कुछ नये मायने तलाशते
बाहर आने की छटपटाहट में
अटके शब्द

एक मुद्दत से
होठों के मुहाने
पलते शब्द

तेरे आने का लंबा इंतज़ार

फिर अचानक
तू आ गयी इतने करीब
मुद्दत से होठों के मुहाने
पलते शब्द
फँस कर रह गये
होठों के बीच

वो मायने
जिन्हे शब्दों ने
नये अर्थ में ढाला

आँखों की उदासी ने
चुपचाप कह डाला

सुना है

आँखों की ज़ुबान होती है.....

74 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उम्दा, बहुत ही सुन्दर व लाजवाब रचना लगी ।

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  2. waah...... Shabdo ki aur ek nayi paribhasha. behtarib Shabd...

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  3. बेशक ऑंखों की ज़ुबान होती है और दुनिया की सब ज़ुबानों से उपर जब ये बोलती हैं तो भाषा व्‍याकरण जैसा कुछ रास्‍ते में नहीं आता।
    बेहतरीन कविता।

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  4. kya kahun is rachna ke bare mein......bahut hi gahre utar gaye hain aap.......gazab ki prastuti.

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  5. आँखों की जुबान होती है बेहतरीन लफ्ज़ और भाव लगे आपकी इस रचना के ...बहुत सुन्दर

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  6. कुछ अनसुलझे सवाल
    कुछ हसीन लम्हे
    जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी

    कितना कुछ
    एक ही साँस में कहने को
    भटकते शब्द
    Kitna khoobsoorat andaze bayan hai!

    जवाब देंहटाएं
  7. is kavita ko ek baar nahin kai baar padha......apni maa ko bhi sunaya........shandaar abhiyakti kahna bhi kam hoga,bas ise padhte jana sukhad hai

    जवाब देंहटाएं
  8. कुछ अनसुलझे सवाल
    कुछ हसीन लम्हे
    जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी

    kya baat akhi hai behtareen.

    जवाब देंहटाएं
  9. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला
    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला
    सुना है
    आँखों की ज़ुबान होती है...
    ..... ankhen bhi bahut kuch bolti hai, jab man udaas ho...
    Bahut achhi rachana... sundar prastuti...

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  10. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....

    LAJAWAB ...................

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  11. सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....
    ===
    जी हाँ सही सुना है और आँखे जब बोलती हैं तो शब्दों से परे केवल अर्थ होता है.
    बहुत खूबसूरत रचना
    उचित गाम्भीर्य
    सलोना भाव

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  12. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....

    wah digambar ji , behatareen abhivyakti, vastav men shabdon ko naye arth pradaan karti abhivyakti.

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  13. निश्चय ही आँखों की ज़ुबान होती है...

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर रचना...शब्द और भाव दोनों ही कमाल्!

    जवाब देंहटाएं
  15. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    बहुत खूबसूरती से रच दिया है आपने शब्दों का संसार, बेहतरीन रचना...

    जवाब देंहटाएं
  16. सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
  17. आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है..... sunder

    जवाब देंहटाएं
  18. आँखों की ज़ुबान होती है.....

    सही है , सुंदर रचना

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  19. यहां अभिव्यक्ति की स्पषटता प्रमुख है| चाहे आंखों की भाषा में ही क्यों न हो।

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  20. जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी

    ओह इतनी चुभन

    वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डालाा आँखें हमेशा कुछ न कुछ कहती हैं बस उन्हें पढने वाले के पास वो नज़र होनी चाहिये
    बहुत अच्छी रचना है। बधाई

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  21. नासवा जी, आदाब
    मुद्दत से होठों के मुहाने...पलते शब्द......
    .....आँखों की उदासी ने...चुपचाप कह डाला....
    सुना है....आँखों की ज़ुबान होती है.....

    जो सुना है....सच ही सुना है..
    और सच ही बोलती हैं यें आंखें
    बेहतरीन.....मुबारकबाद

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  22. आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला
    .....बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!

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  23. बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली रचना.

    रामराम.

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  24. डिक्शनरी के पन्नों की
    फड़फड़ाहट के बीच
    कुछ नये मायने तलाशते
    बाहर आने की छटपटाहट में
    अटके शब्द
    अहा ! क्या बात कही नासवा साहब,
    सुना है आँखों की भी ज़ुबान होती है।
    लाजवाब।
    सर जी आपने कितनी सहजता से फ़रमाया के आँखों की उदासी ने चुपचाप कह डाला। बहुत आला।
    हमसे आप तक पहुँचने में देर हो गई जी।
    मुआफ़ रखिएगा।

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  25. बेहतरीन ...शब्दो को पिरोना आप से सीखना ही पडेगा

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  26. पहली बार आपके ब्लाग पर आया और प्रभावित हुआ!!

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  27. आँखों की जुबान होती है लाजवाब।बहुत ही सुंदर !!

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  28. बहुत सुन्दर रचना...शब्द और भाव दोनों ही कमाल्!

    जवाब देंहटाएं
  29. अति सुंदर भाव ओर अति सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  30. बहुत खूबसूरत भाव । आपने खूब कहा " आँखों की ज़ुबान होती हैं ।" इस पर एक शेर अर्ज़ है -"बड़े नादान है, वो जो ज़ुबाँ से काम लेते है ।
    जो निगाहों से ना हो, तो गुफ़्तगू क्या हैं ॥"

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  31. सार्थक और सुंदर अभिव्यक्ति के साथ.... सुंदर रचना....

    आँखों की ज़ुबान होती है.... बहुत सुंदर पंक्ति....दिल को छू गई....

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  32. शुक्रिया , आप जैसे हस्सास इंसान से ऐसे ही कमेन्ट और ऐसी ही जज़्बाती' कविताओं की उम्मीद की जा सकती है चाहे वो यादें हो ,चाहत हो या ख्वाब .

    जवाब देंहटाएं
  33. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....

    वाह ! बहुत उम्दा. बेहतरीन.

    जवाब देंहटाएं
  34. डिक्शनरी के पन्नों की
    फड़फड़ाहट के बीच
    कुछ नये मायने तलाशते
    बाहर आने की छटपटाहट में
    अटके शब्द
    .............उफ़ क्या इमेजिनेसन है.........क्या शमा बाँधा है भाई.....बहुत बहुत बधाई......शानदार कविता!

    जवाब देंहटाएं
  35. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

    सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।
    अनुबन्ध आज सारे, बाजार हो गये हैं।।

    न वो प्यार चाहता है, न दुलार चाहता है,
    जीवित पिता से पुत्र, अब अधिकार चाहता है,
    सब टूटते बिखरते, परिवार हो गये हैं।
    सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।।

    घूँघट की आड़ में से, दुल्हन का झाँक जाना,
    भोजन परस के सबको, मनुहार से खिलाना,
    ये दृश्य देखने अब, दुश्वार हो गये हैं।
    सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।।

    वो सास से झगड़ती, ससुरे को डाँटती है,
    घर की बहू किसी का, सुख-दुख न बाटँती है,
    दशरथ, जनक से ज्यादा बेकार हो गये हैं।
    सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।।

    जीवन के हाँसिये पर, घुट-घुट के जी रहे हैं,
    माँ-बाप सहमे-सहमे, गम अपना पी रहे हैं,
    कल तक जो पालते थे, अब भार हो गये हैं।
    सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।।

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  36. जब शब्द लरजते हैं, फिर देखिये, आँखों की ज़ुबान होती है....! दिगंबर जी, अहसास खुल कर बाहर आये हैं... इस कविता में.

    जवाब देंहटाएं
  37. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....

    BEHTAREEN !

    जवाब देंहटाएं
  38. दिल की बात को लफ्जों में पिरोया है
    शब्दों को पढकर दिल मेरा रोया है।

    --------
    संवाद सम्मान 2009
    जाकिर भाई को स्वाईन फ्लू हो गया?

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  39. बहुत सुन्दर
    फिर अचानक
    तू आ गयी इतने करीब
    मुद्दत से होठों के मुहाने
    पलते शब्द
    फँस कर रह गये
    होठों के बीच
    बहुत बहुत आभार

    जवाब देंहटाएं
  40. नैकु कही बैनन ,अनेकू कही नैनन
    नैनो की ही भाषा सत्य है ! बधाई !

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  41. मुझे कविता के मध्य बिंदु बहुत पसंद आए...और आपकी पारखी नज़र यहाँ समझ में आई॥

    मुद्दत से होठों के मुहाने
    पलते शब्द

    अक्सर मुहाने और पलते के बीच "में"शब्द को लिख दिया जाता है... मुहाने में पलते शब्द..ये गलत प्रयोग है...और कविता में "मुहाने पलते" ने आकर्षित किया..

    डिक्शनरी के पन्नों की
    फड़फड़ाहट के बीच
    कुछ नये मायने तलाशते
    बाहर आने की छटपटाहट में
    अटके शब्द

    ये बिंदु और गंभीर हो सकते थे...डिक्शनरी शब्द ने परेशान कर दिया...यहाँ पर...

    मगर कविता और बहुत से आयामों से पसंद आई

    जवाब देंहटाएं
  42. आँखों की ज़ुबान होती है..... yaqeenan hoti hai

    naina thag lenge
    naina banjar kar dengey
    saara khel zubaani...

    gana hai na...

    जवाब देंहटाएं
  43. 'कितना कुछ
    एक ही साँस में कहने को
    भटकते शब्द'.........आँखों की ज़ुबान होती है'

    *****जब खामोश होती है ज़ुबाँ, तो आँखें बोलती हैं!****
    खूबसूरत अभिव्यक्ति..

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  44. aankho ki hi jubaan hoti he nasvaji..jo shbd hotho ke muhane palate he..waah..unke dard me bhi gazab kaa romanch hota he..seedhe dil ki dhadkano ko jhankrat kar jaataa he..
    होठों के मुहाने
    पलते शब्द
    फँस कर रह गये
    होठों के बीच
    muhane par..fir beech me aa jaanaa, thoda sa atpata jaroor lagaa kintu..shbd he kavo apni rachna me uske saath apni samvednaye, abhivyakti lekar chaltaa he tosaakr ho jaate he.

    जवाब देंहटाएं
  45. सच कह दिया आपने कि आँखों कि जुबान होती है..

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  46. Bahut khubsurat ... avyakt-amurt ko vyakt kartee panktiyaan...

    sach me " ankh ! dil kee jubaan hai"

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  47. आँखों की ज़ुबान होती है...गहरे भाव लिये हुये, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  48. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला
    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला
    सुना है
    आँखों की ज़ुबान होती है.... सच कहा है आपने---जहां शब्द मौन रह जाते हैं वहां आंखें बहुत कुछ कह जाती हैं। खूबसूरत रचना। पूनम

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  49. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    ....वाह! बेहतरीन.

    जवाब देंहटाएं
  50. डिक्शनरी के पन्नों की
    फड़फड़ाहट के बीच
    कुछ नये मायने तलाशते
    बाहर आने की छटपटाहट में
    अटके शब्द

    bahut khoob .....aapne to likh diya ....padhne waale bezuba hue uska kya ?:-)

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  51. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  52. सुंदर और प्रभावशाली रचना।

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  53. वाह बहुत ही ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम!

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  54. अक्सर आंखे सच बोल देती हैं भाई जी ....बहुत बढ़िया रचना ..

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  55. जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी

    na jane kyun ashok vajpeyee yaad ho aaye.

    umda bahut umda

    satya

    जवाब देंहटाएं
  56. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला
    बहुत ही ख़ूबसूरत पंक्तियाँ....

    जवाब देंहटाएं
  57. कुछ अनसुलझे सवाल
    कुछ हसीन लम्हे
    जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी
    .......बहुत ही सुन्दर व लाजवाब रचना .

    जवाब देंहटाएं
  58. वो मायने
    जिन्हे शब्दों ने
    नये अर्थ में ढाला

    आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....
    bahut khoob har shabd

    जवाब देंहटाएं
  59. सुन्दरता से शब्दों को पिरो दिया
    आपकी कविता नें मन को भिगो दिया

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  60. बहुत लाजवाब, रचना है दिल को छू गयी
    कुछ अनसुलझे सवाल
    कुछ हसीन लम्हे
    जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी

    जवाब देंहटाएं
  61. जिस्म में उगी
    आवारा ख्वाबों की
    भटकती नागफनी

    जिस्म मे उगती ख्वाबों कीए नागफ़नी और वो भी आवारा भटकन के साथ..इतने गहरे खयाल किस कारखाने मे पैदा होते हैं..पता हमको भी बताया जाये..
    वैसे भी बात जब ’शब्द’ की आती है..तो आप सचिन तेंदुलकर होते हैं..:-)

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  62. कोई जवाब नही..लाजवाब...सुंदर रचना बधाई दिगंबर जी!!

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  63. कितना कुछ
    एक ही साँस में कहने को
    भटकते शब्द
    kehna aasaan nahi hota lekin apne keh diya.... bahut khoob..

    ...aap kahaan ho koi tippni nahi huee aap ki tarf se...

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  64. आँखों की उदासी ने
    चुपचाप कह डाला

    सुना है

    आँखों की ज़ुबान होती है.....

    bahut khoob likha apne..
    ankhon ki zubaan to hoti hi hai lekin samjhne wale aap jaise hon tau......
    sirf apke liye main kavita hindi mein likh rahaan hoon.

    जवाब देंहटाएं

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