बुधवार, 9 नवंबर 2011

रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

धीरे धीरे हर सैलाब उतर जाता है
वक्त के साथ न जाने प्यार किधर जाता है

यूँ ना तोड़ो झटके से तुम नींदें मेरी
आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है

आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है

बचपन और जवानी तो आनी जानी है
सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

अपने से ज़्यादा रहता हूँ तेरे बस में
चलता है ये साया जिस्म जिधर जाता है

सुख में मेरे साथ खड़े थे बाहें डाले
दुख आने पे अक्सर साथ बिखर जाता है

कुछ बातें कुछ यादें दिल में रह जाती हैं
कैसे भी बीते ये वक़्त गुज़र जाता है

माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

89 टिप्‍पणियां:

  1. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है
    वाह ...बहुत ही बढि़या ।

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  2. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है
    सही फ़रमाया आपने ,बहुत खूब ..

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

    लाजवाब दिगंबर भाई लाजवाब...वाह...क्या खूबसूरत ग़ज़ल कही है...सुभान अल्लाह...वाह

    नीरज

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  5. सभी शेर बढ़िया हैं... पूरी ग़ज़ल प्रभाव छोड़ रही है... यह शेर खास पसंद आई..
    "आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
    इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है "

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  6. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

    यह भी एक कडवी सच्चाई है .



    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है



    सही है पर कुछ समय बाद आवाज़ भी थक जाती है रोते रोते .

    आखिर हंसने से तन और मन दोनों का बोझ उतर जाता है . :)

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  7. यूँ ना तोड़ो झटके से तुम नींदें मेरी
    आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है

    आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
    इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है

    बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है
    Waise to sabhee ashaar ek se badhake ek hain!

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  8. आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
    इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है
    वाह!
    बेहद सुन्दर ग़ज़ल! हर एक भाव से हृदय जुड़ सा जाता है!

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  9. सार्थक अशआरों के साथ बहुत अच्छी प्रस्तुति!

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  10. यूँ ना तोड़ो झटके से तुम नींदें मेरी
    आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है
    aur bina sapnon ke neend poori nahin hoti, jeene kee koi kahani nahi banti

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  11. कुछ बातें कुछ यादें दिल में रह जाती हैं
    कैसे भी बीते ये वक़्त गुज़र जाता है

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है ...बहुत सुन्दर अभ्व्यक्ति!!

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  12. अपने से ज़्यादा रहता हूँ तेरे बस में
    चलता है ये साया जिस्म जिधर जाता है

    behatareen, dil ko chhoo gaye ye shabd. wah wah wah

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  13. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है
    ....सच माँ माँ होती है....माँ जैसा दूसरा कौन होगा...

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है
    ........बिलकुल मन की बात कह दी आपने..
    बहुत ही सुन्दर मन में उतरने वाली रचना प्रस्तुति हेतु आभार!

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  14. सुख में मेरे साथ खड़े थे बाहें डाले
    दुख आने पे अक्सर साथ बिखर जाता है

    हर शेर लाज़बाब है...बहुत ही प्रभावपूर्ण ग़ज़ल.

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  15. दिगम्बर भाई ,
    अपने तजुर्बे से मैं इस शेर को lock करना चाहूँगा
    बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है|हा हा :-)
    सब खूबसूरत ....शुभकामनाएँ !

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  16. बहुत सुन्दर ग़ज़ल... हर एक भाव दिल की गहराइयों से निकला हुआ सा लगता है और खरे सोने सा सच्चा...

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  17. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है
    और फिर
    आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
    इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है
    वाह ... बेहतरीन

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  18. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है
    great,hats off to you for these lines.har sher laajabaab hai ...bemisaal panktiyan.

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  19. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है
    great,hats off to you for these lines.har sher laajabaab hai ...bemisaal panktiyan.

    जवाब देंहटाएं
  20. आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है
    सुख में मेरे साथ खड़े थे बाहें डाले
    दुख आने पे अक्सर साथ बिखर जाता है
    khoobsoorat panktiyan ...

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  21. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    बिलकुल सही बात कही सर!

    सादर

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  22. बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जात

    बहुत खूब ...सत्य दर्शन करवाती रचना

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  23. बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    ...बहुत खूब! इन पंक्तियों का कोई ज़वाब नहीं.. सभी शेर बहुत सटीक और दिल को छू जाते हैं..

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  24. बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    ...बहुत खूब! इन पंक्तियों का कोई ज़वाब नहीं.. सभी शेर बहुत सटीक और दिल को छू जाते हैं..

    जवाब देंहटाएं
  25. किस किस शेर को मैं कोटे करूँ?
    हर शेर दिल में घर कर जाता है.

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  26. बहुत खूब
    हर शेर पर दिल से वाह वाह निकली है

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  27. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    बहुत ही संवेदनशील शेर हैं सब, हमेशा की तरह एक उम्दा ग़ज़ल!

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  28. सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है
    हृदयस्पर्शी ....

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  29. बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

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  30. यूँ ना तोड़ो झटके से तुम नींदें मेरी
    आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है


    बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    गज़ल का हर शेर लाजवाब ..खूबसूरत गज़ल

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  31. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    सुन्दर प्रस्तुति हेतु आभार!

    सुन्दर अभ्व्यक्ति!!

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  32. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    -वाह!! क्या बात है!! बहुत उम्दा गज़ल!!

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  33. आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है । ।धन्यवाद ।

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  34. आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
    इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है
    aap ki har ghazal men koi n koi sher watan se door rahne ka dard bayaan karta hai ,,dil ko chhoo gaya sher

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है
    bilkul sach kaha aap ne
    bahut khoob
    khoobsoorat aur bhavpoorn ghazal
    ki takhleeq mubarak ho

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  35. बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल....

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  36. हर शेर में बिलकुल सौ-फीसदी सच बात!!:)

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  37. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-694:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  38. बहुत उम्दा गजल..
    बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    यह सही है, बचपन और युवावस्था तो पलक झपकते बीत जाती है रह जाता है अंतहीन बुढ़ापा... परसों मेरी अस्सी वर्षीय सासु माँ ने गिर कर अपनी कूल्हे की हड्डी तुडवा डाली पहले से ही कष्टदायक उनका बुढ़ापा और दुःख पूर्ण हो गया है.

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  39. वाह! हमेशा की तरह लाज़वाब।

    गज़ल पढ़कर गुनगुनाये बिना रहा नहीं जाता
    किसी को रोककर सुनाये बिना रहा नहीं जाता।

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  40. कुछ कहने के काबिल आप कहाँ रखते हैं,
    आपका शेर जिगर में ऐसे उतर जाता है!
    जिंदाबाद! दिगंबर भाई!!

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  41. बेहतरीन ग़ज़ल,उम्दा अशार |अलग अलग भावों को बहुत अच्छे से प्रतिपादित किया है आपने,सार्थक व सकारात्मक रचना !

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  42. बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    बहुत बढिया !

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  43. बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है
    सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है...
    सटीक पंक्तियाँ! सच्चाई को आपने बड़े ही खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है! उम्दा रचना !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.com/

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  44. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    इन पंक्तियों का सच ..बहुत ही गहरे उतर गया..नमन आपकी लेखनी को ...।

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  45. बहुत सच लिखा आपने....नासवा जी
    ....खूबसूरत गज़ल

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  46. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    हमेशा की तरह लाजवाब गज़ल.

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  47. आपकी गजल हर बार उम्दा होती है
    जिसमे जीवन की सच्चाई होती है!

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है !
    सही कहा है इन आँसुओ के खारेपन में
    जीवन के अनंत दुःख धुल जाने की क्षमता है !

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  48. यूँ ना तोड़ो झटके से तुम नींदें मेरी
    आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है

    सुन्दर शेर सर,
    शानदार ग़ज़ल...
    सादर बधाई...

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  49. @माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है


    जी, कहीं कहीं तो बिलकुल सटीक लगता है..

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  50. सुख में मेरे साथ खड़े थे बाहें डाले
    दुख आने पे अक्सर साथ बिखर जाता है

    कुछ बातें कुछ यादें दिल में रह जाती हैं
    कैसे भी बीते ये वक़्त गुज़र जाता है

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    हर शेर उम्दा ..
    बधाई ..!

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  51. सुख में मेरे साथ खड़े थे बाहें डाले
    दुख आने पे अक्सर साथ बिखर जाता है

    बिलकुल सही कहा है आपने.

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  52. बहुत चुन-चुन के शेर मारे हैं हुजूर...बधाइयाँ...

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  53. खूबशूरत क्या खूब लिखने अंदाज पसंद आया
    लाजबाब पोस्ट...अच्छी गजल मेरे नए पोस्ट
    में स्वागत है...

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  54. क्या बात है ! बहुत ही सुन्दर शेर...

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  55. आने जाने वालों से ये कहती सड़कें
    इस चौराहे से इक रस्ता घर जाता है

    अपने से ज़्यादा रहता हूँ तेरे बस में
    चलता है ये साया जिस्म जिधर जाता है

    नयापन लिए हुए बेहतरीन शेर

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  56. बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल...उदासी जब स्थाई हो जाती है और आशा जब साथ छोड़ जाती है तब दिल जाने कैसे वक़्त के मंजर काटता फिरता है....

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  57. कुछ बातें कुछ यादें दिल में रह जाती हैं
    कैसे भी बीते ये वक़्त गुज़र जाता है
    बेहतरीन.

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  58. कुछ बातें कुछ यादें दिल में रह जाती हैं
    कैसे भी बीते ये वक़्त गुज़र जाता है
    .....बहुत खूबसूरत शेर !

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  59. सम्पूर्ण रचना पसन्द आयी लेकिन निम्न शेर खास लगा:
    सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

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  60. sach hai dil ka boh utar jata hai....poori rachna sundar par mujhe headline ne hi sochne par majboor kar diya

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  61. सब अनुभव की और सार्वकालिक बातें हैं। एकदम खरी-खरी।

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  62. यूँ ना तोड़ो झटके से तुम नींदें मेरी
    आँखों से फिर सपना कोई झर जाता है

    क्या खूब ग़ज़ल कही है आपने।
    आंखों से सपने का झरना...वाह।

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  63. सुख में मेरे साथ खड़े थे बाहें डाले
    दुख आने पे अक्सर साथ बिखर जाता है
    सहज सरल शब्दों में सीधे सीधे अलफ़ाज़ में युगीन सत्य कह दिया है आपने .

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  64. बढ़िया गज़ल सुंदर भावों से परिपूर्ण ...

    बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    एक एक शेर संसार के सच को परिलक्षित करती है.

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  65. भाव से हृदय जुड़ सा जाता है!...बेहद सुन्दर ग़ज़ल!

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  66. नासवा जी किस -किस शेर की तारीफ करूँ .....
    यहाँ तो सबके लिए बस ' वाह ..'.ही निकलती है .....

    धीरे धीरे हर सैलाब उतर जाता है
    वक्त के साथ न जाने प्यार किधर जाता है ...

    वाह...वाह.....अपनी एक ग़ज़ल का शेर याद आ गया .....

    ख़त तो अब आते हैं तेरे मगर
    वो पहले सी महक नहीं आती


    बचपन और जवानी तो आनी जानी है
    सिर्फ़ बुढ़ापा उम्र के साथ ठहर जाता है

    kyaa baat है ......

    सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

    bahut khoob .....

    अपने से ज़्यादा रहता हूँ तेरे बस में
    चलता है ये साया जिस्म जिधर जाता है

    oye होए .....

    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    जी .....baat wahi purani है पर
    andaz nya kuchh bhar jata है .....

    दाद काबुल करें ....
    .mtla तो दिल le गया .....

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  67. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    बिल्कुल सही कहा ,खूबसूरत गज़ल.

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  68. धीरे धीरे हर सैलाब उतर जाता है
    वक्त के साथ न जाने प्यार किधर जाता है
    सीमा के उस पार भी माएँ रोती होंगी
    बेटा होता है जो सैनिक मर जाता है

    अपने से ज़्यादा रहता हूँ तेरे बस में
    चलता है ये साया जिस्म जिधर जाता है
    माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    ek ek shabd sach ke kadve ghoont peeta hua.

    umda gazal.

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  69. सुन्दर...बहुत बहुत सुन्दर...सभी के सभी ...

    लाजवाब रचना...हमेशा की तरह...

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  70. बहुत बहुत खूबसूरत...आत्मा तृप्त हो जाती है आपकी रचनाएं पढ़ कर.

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  71. अपने से ज़्यादा रहता हूँ तेरे बस में
    चलता है ये साया जिस्म जिधर जाता है
    bahut khoob :)

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  72. बहुत बहुत सुन्दर...खूबसूरत गज़ल..

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  73. पर नंगा सच साँसों में फंस जाता है..

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  74. आस्तित्व का वरदान,आंसू दिये,वरना शिला की तरह हो गये होते.सुंदर.

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  75. i like to read hindi poems i love read poems from dr. harivansh , rakesh sharma , jayadev ji and other poet of hindi .

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  76. माना रोने से कुछ बात नहीं बनती पर
    रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है

    hmmmmm

    naaz

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  77. wahh sir....
    bahut hi gajab ka likha hai apne..
    pratek pankti lajavab hai....
    rone se dil ka bojha halaka hota hai
    bahut khoob....

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है