मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

तेरा वजूद ...

गज़लों के दौर से निकल कर हाजिर हूँ आज कविता के साथ ... आशा है आपको पसंद आएगी ...

अब जबकि हमारे बीच कुछ नही
पता नहीं क्यों तेरी मोहिनी
अब भी मुझे बांधे रखती है

ठुकरा नहीं पाता
तेरी आँखों का मौन आमंत्रण
उन्मादी पहलू का मुक्त निमंत्रण

जबकि कई बार
तेरी धूप की तपिश
अपनी पीठ पे महसूस करने के बावजूद
जेब में नहीं भर सका

तेरे बादलों की बरसात
मुझे भिगोती तो है
पर हर बार उफनती नदी सी तुम
किनारे पे पटक
गंतव्य को निकल जाती हो

मुट्ठी में बंद करने के बावजूद
हाथों की झिर्री से हर बार
चुप-चाप फिसल जाती हो

तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
तेरी कस्तूरी की तलाश में
कुलांचें मारता हूँ
थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
फिर कुलांचें मारता हूँ

हाँ मुझे मालुम है
हमारे बीच कुछ नहीं
पर लगता है ... समझना नहीं चाहता

और वैसे भी क्या पता
साँसों का सिलसिला कब तक रहेगा

80 टिप्‍पणियां:

  1. जबकि कई बार
    तेरी धूप की तपिश
    अपनी पीठ पे महसूस करने के बावजूद
    जेब में नहीं भर सका

    सिर्फ़ यही कह सकती हूँ ………
    एक अनजाना चेहरा
    अनजाना अहसास
    है यहीं कहीं आस पास्…………
    बताओ कैसे कहूँ
    दूर हो तुम मुझसे…………
    वजूद ही तो मोहब्बत का प्रमाण नही होता ना।

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  2. कविता में प्यारे एहसासों के साथ एक निराशा का भी भाव है.
    सुन्दर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  3. तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुचालें मारता हूँ
    ....आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना नासवा जी

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति है आपकी.
    पढकर मन मग्न हो गया है.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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  5. आपके शब्द बहुत प्रभावित करते है....नासवा जी

    जवाब देंहटाएं
  6. नासवा जी ,बधाई
    हमेशा की तरह अहसासों से भरी सुंदर कविता ...
    मुट्ठी में बंद करने के बावजूद
    हाथों की झिर्री से हर बार
    चुप-चाप फिसल जाती हो |

    आप का इंतज़ार है यहाँ !
    http://ashokakela.blogspot.com/2011/11/blog-post_30.html

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  7. कविता में प्यार में आने वाले उतार चढ़ाव के भावों का सुंदर समावेश है ....

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  8. Gazal ki tarah hi aapki kavita bhi bemisaal.

    Khoobsurat rachna. . .
    Aabhaar....!!

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  9. भावों की गाँठ विचित्र बँधी होती है, खुलने पर भी निशान रह जाते हैं।

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  10. नासवा जी, उत्कृष्ट रचना है ये कशमकश.

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  11. वाह बहुत ही खुबसूरत बेहतरीन रचना ..

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  12. तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुचालें* मारता हूँ
    थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
    फिर कुचालें मारता हूँ

    सर!बहुत ही अच्छी लगी कविता।

    "कुचालें* मारता हूँ"
    यह कुलाचें होगा न सर!

    सादर

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  13. मन के कशमकश को दर्शाती सुन्दर रचना

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  14. तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुचालें मारता हूँ
    थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
    फिर कुचालें मारता हूँ .... बहुत ही सारगर्भित रचना , जिसमें हार के भी मनोबल नहीं टूटता , खुद पर विश्वास है

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  15. एक बंधन, जिससे छोटने का प्रयास उसे और बंधने को मजबूर करता है..जितना उसके सम्मोहन से मुक्त होने की चेष्टा करें, उतना ही बाँध लेता है सम्मोहन.. गज़ल की तरह कविता भी भावों का नयापन लिए..
    आँख से आँख मिलाता है कोई,
    दिल को खेंचे लिए जाता है कोई!!

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  16. तेरे बादलों की बरसात
    मुझे भिगोती तो है
    पर हर बार उनफती नदी सी तुम
    किनारे पे पटक
    गंतव्य को निकल जाती हो
    वाह ! बेहतरीन नासवा जी !!

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  17. जब पता चल ही गया कि वह मरीचिका है,फिर वहां कस्तूरी की खोज कैसे?

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  18. मिश्रित सा भाव उठा दिया आपने..

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  19. तेरे बादलों की बरसात
    मुझे भिगोती तो है
    पर हर बार उनफती नदी सी तुम
    किनारे पे पटक
    गंतव्य को निकल जाती हो

    कविता भी गज़ल जैसे ही सुंदर भाव. सुंदर प्रस्तुति.
    शुभकामनायें.

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  20. तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुचालें मारता हूँ
    थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
    फिर कुचालें मारता हूँ
    Aah!

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  21. ठुकरा नहीं पाता
    तेरी आँखों का मौन आमंत्रण
    उन्मादी पहलू का मुक्त निमंत्रण ...

    Awesome !

    .

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  22. बहुत सुमधुरु कविता...
    धूप की तपिश को मुट्ठी में कौन बाँध सका है..
    मगर इस कविता ने बाँध लिया....

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  23. अन्‍त में जाते-जाते हथियार क्‍यों डाल दिए हैं आपने?

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  24. यह अहसास प्रेमिका के लिये भी हो सकता है देश के लिये भी । सुंदर अति सुंदर । चाहे लगे कि कुछ नही पर कुछ ना कुच ते हमेशा रहता ही है ।

    उफनती होना चाहिये उनफती की जगह और कुलांचें कुचालें की जगह ।

    जवाब देंहटाएं
  25. आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  26. खुबसूरत एहसासों से भरी सुन्दर रचना सर....
    सादर बधाई...

    जवाब देंहटाएं
  27. कविता भी सुन्दर , आपकी ग़ज़लों की तरह ।
    प्यार में कुछ कुछ ऐसा ही होता है ।
    क्या सभी प्रेमी अंत में निराश हो जाते हैं ?

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  28. ओह वियोग की कितनी गहनता !

    जवाब देंहटाएं
  29. ये तू और तुम का फासला क्‍यों रखा है। इसे भी मिटा डालिए।

    जवाब देंहटाएं
  30. तेरे बादलों की बरसात
    मुझे भिगोती तो है
    पर हर बार उफनती नदी सी तुम
    किनारे पे पटक
    गंतव्य को निकल जाती हो

    सुंदर भाव अच्छे लगे !

    जवाब देंहटाएं
  31. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  32. आशा निराशा और प्यार के बीच में कुछ ऐसा ही होता है,...खुबशुरत प्रस्तुति,.....
    मेरे नए पोस्ट में इंतजार है,...

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  33. कुछ तो है तेरे मेरे दरमयां
    जिसे हम कह नही पाते
    और तुम समझ नही पाते
    अगर समझ जाते तुम तो
    मोह्हबत कि तासीर से बच नही पाते.

    उम्दा रचना. आभार.

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  34. हाँ मुझे मालुम है
    हमारे बीच कुछ नहीं
    पर लगता है ... समझना नहीं चाहता

    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ...

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  35. खूबसूरत एहसास...वैसे एक पर्सनल राय है...

    इस राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जायेगा...
    तुम्हें जिसने दिल से भुला दिया उसे भुलाने की दुआ करो...

    नदी बदल दो...डूबने के लिए...

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  36. तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    मन की उलझन भरे भाव... नाज़ुक अहसास

    जवाब देंहटाएं
  37. तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    मन की उलझन भरे भाव... नाज़ुक अहसास

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  38. ये वो राह है जिसमें मालूम है कि फिसलन है फिर भी चलने में मज़ा आता है।

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  39. सुंदर बिंबों के सहारे मंत्र मुग्ध कर देने वाले अहसास जगाये हैं आपने। गज़ल न होकर भी यह कविता गज़ल की तरह तरंगित करती है मन को।

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  40. एक अच्छा संदेश है इस कविता मे।

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  41. भावमय करते शब्‍दों का संगम ...
    वाह ...बहुत ही बढि़या अभिव्‍यक्ति ।

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  42. प्रेम में मरीचिका सा आकर्षण और बींधने की कूवत होती है .और बस प्रेमी भागता रहता है मरीचिका को पकड़ने .एक राग लिए है उफान लिए है ज्वार लिए है भावना का अतृप्ति का पूरी कविता एक अधूरापन छोड़ जाती है .

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  43. प्रेम की अटल गहराइयों से उपजी कविता...

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  44. वजूद तेरा आज भी जज्ब है मेरे जर्रे जर्रे में ..बहुत सुन्दर ...

    जवाब देंहटाएं
  45. तेरे बादलों की बरसात
    मुझे भिगोती तो है
    पर हर बार उफनती नदी सी तुम
    किनारे पे पटक
    गंतव्य को निकल जाती हो .

    भावपूर्ण और प्रवाहमयी खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  46. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना ..!

    जवाब देंहटाएं
  47. गज़लों की तरह यह मुक्तक भी अच्छा बन पड़ा है.

    आपको पढ़ना हमेशा सुखद रहता है ,पता नहीं बीच में फीड क्यों नहीं आई मेरे पास ?

    आभार आपका !

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  48. कोमल भावनाओं में डूबी उत्कृष्ट रचना बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  49. खूबसूरत! मुश्क छिपती नहीं, मुहब्बत बन्धती नहीं!

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  50. भावुक, मोहक, हृदयस्पर्शी प्रेमोद्गार....वाह !!!!!

    जवाब देंहटाएं
  51. भावों से नाजुक शब्‍द......बेजोड़ भावाभियक्ति....

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  52. namaskar nasva ji

    अब जबकि हमारे बीच कुछ नही
    पता नहीं क्यों तेरी मोहिनी
    अब भी मुझे बांधे रखती है ........bahut hi sunder rachna . bhavo ka sunder chitran . badhai swikar karen

    जवाब देंहटाएं
  53. जबकि कई बार
    तेरी धूप की तपिश
    अपनी पीठ पे महसूस करने के बावजूद
    जेब में नहीं भर सका..

    javaab nahi bahut gahan abhivykati...

    जवाब देंहटाएं
  54. आदरणीय
    ग़ज़ल की दुनिया से बहार निकलकर कविता से जुड़ने का यह एहसास अच्छा है.... मगर हमें तो आपकी ग़ज़ल का ही इन्तिज़ार है

    तेरे बादलों की बरसात
    मुझे भिगोती तो है
    पर हर बार उफनती नदी सी तुम
    किनारे पे पटक
    गंतव्य को निकल जाती हो

    कविता का यह अंश बहुत सुन्दर है

    जवाब देंहटाएं
  55. बेहद गंभीर प्रेम की कविता... बहुत सुन्दर...

    जवाब देंहटाएं
  56. जबकि कई बार
    तेरी धूप की तपिश
    अपनी पीठ पे महसूस करने के बावजूद
    जेब में नहीं भर सका

    सुन्दर बिम्बों से सजी संवेदना को झकझोरती बेहतरीन कविता !
    आभार !

    जवाब देंहटाएं
  57. Lots of good reading here, thank you! I had been browsing on yahoo when I identified your post, I’m going to add your feed to Google Reader, I look forward to additional from you
    From Great talent

    जवाब देंहटाएं
  58. मार ही डालोगे क्या प्रभु....वाई दिस केलावरी.................

    जवाब देंहटाएं
  59. प्रिय दिगम्बर जी सुन्दर रचना --भावपूर्ण प्रस्तुति ...सच कहा आप ने .....साँसों का सिलसिला कब तक रहेगा
    आभार
    भ्रमर ५ ....

    तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुलांचें मारता हूँ
    थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
    फिर कुलांचें मारता हूँ

    जवाब देंहटाएं
  60. खूब सूरत रचना ,लिखी आपने भोगा हमने भी है यह यथार्थ भाव .

    तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुलांचें मारता हूँ
    थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
    फिर कुलांचें मारता हूँ

    हाँ मुझे मालुम है
    हमारे बीच कुछ नहीं
    पर लगता है ... समझना नहीं चाहता

    और वैसे भी क्या पता
    साँसों का सिलसिला कब तक रहेगा .
    भाई साहब आपकी कई टिपण्णी स्पेम में पड़ी थीं अभी रिलीज़ करवाएँ हैं .शुक्रिया आपकी खूबसूरत आवा जाही का प्रोत्साहन का .

    जवाब देंहटाएं
  61. खूब सूरत रचना ,लिखी आपने भोगा हमने भी है यह यथार्थ भाव .

    तेरी मरीचिका में बंधा मेरा वजूद
    करीब होकर भी तुझे छू नहीं पाता
    तेरी कस्तूरी की तलाश में
    कुलांचें मारता हूँ
    थकता हूँ गिरता हूँ उठता हूँ
    फिर कुलांचें मारता हूँ

    हाँ मुझे मालुम है
    हमारे बीच कुछ नहीं
    पर लगता है ... समझना नहीं चाहता

    और वैसे भी क्या पता
    साँसों का सिलसिला कब तक रहेगा .
    भाई साहब आपकी कई टिपण्णी स्पेम में पड़ी थीं अभी रिलीज़ करवाएँ हैं .शुक्रिया आपकी खूबसूरत आवा जाही का प्रोत्साहन का .

    जवाब देंहटाएं
  62. मैं जानता हूँ कि तू गैर है मगर यूँ ही.....
    कविता को बखूबी अंजाम दिया है.

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  63. ghazal...shaayri aur kavitayen...gazab ki hoti hain aapki..
    ekdam awesome types :)

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  64. तेरे बादलों की बरसात
    मुझे भिगोती तो है
    पर हर बार उफनती नदी सी तुम
    किनारे पे पटक
    गंतव्य को निकल जाती हो

    ......लाज़वाब....उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति..

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  65. अद्भुत सुन्दर ग़ज़ल! ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति के साथ उम्दा प्रस्तुती!

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  66. जबकि कई बार
    तेरी धूप की तपिश
    अपनी पीठ पे महसूस करने के बावजूद
    जेब में नहीं भर सका

    loved d way u express

    regards

    Naaz

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  67. ग़ज़लों की तरह कविता भी बेहतरीन

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  68. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  69. हाँ मुझे मालुम है
    हमारे बीच कुछ नहीं
    पर लगता है ... समझना नहीं चाहता
    ...क्योंकि एक आस ही रह जाती है जीवित .....जो तिनका बन जाती है ....! सुन्दर !!!!!

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है