बुधवार, 28 दिसंबर 2011

तेरा एहसास ...

आप सभी को नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकामनाएं ...

तुमसे अलग होने बाद
कितनी बार तुमसे अलग होना चाहा
पर हो न सका

सुबह की अखबार के साथ
तुम घर में घुसती हो
तो तमाम कोशिशों के बावजूद निकलती नहीं

ख़बरों के साथ
तेरे एहसास को फ्लश आउट करने की कोशिश तो करता हूँ
पर तभी चाय की खुशबू अपना असर दिखाना शुरू कर देती है
और तुम ...
तुम चुस्कियों के साथ
मेरे जिस्म में उतरने लगती हो

सुबह से शाम तुम्हारी गिरफ्त में
कब दिन बीत जाता है पता नहीं चलता
रात होते होते तमाम रद्दी बेचने का निश्चय करता हूँ
पर सुबह आते आते फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है

तेरी यादों की तरह
पुरानी अखबार का ढेर भी बढ़ता जा रहा है

इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
पर इस अखबार का क्या करूं
ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
छपने लगी है

88 टिप्‍पणियां:

  1. सुबह से शाम तुम्हारी गिरफ्त में
    कब दिन बीत जाता है पता नहीं चलता
    रात होते होते तमाम रद्दी बेचने का निश्चय करता हूँ
    पर सुबह आते आते फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है ... excellent , amazing , gr8 .... bas waah waah waah

    जवाब देंहटाएं
  2. सुबह के अख़बार में कमबख्त आती भी बहुत हैं । :)

    अख़बार और चाय के साथ यूँ याद करना भी बड़ा कलात्मक रहा ।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह ..बहुत खूब ...बढि़या भाव संयोजन ।

    जवाब देंहटाएं
  4. खूबसूरत कविता.... बिल्कुल नए तरह का विम्ब ...

    जवाब देंहटाएं
  5. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है
    क्या तालमेल बैठाया है अखबार से यादों का.
    गज़ब.

    जवाब देंहटाएं
  6. सुबह की चाय और अखबार के साथ घुली मिली तुम्हारी याद ....
    वाह ! और क्या !

    जवाब देंहटाएं
  7. अलग होकर भी अलग न होना...
    सुन्दर एहसास!

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना !
    मेरी नई पोस्ट पे आपका हार्दिक स्वागत है !

    जवाब देंहटाएं
  9. तेरी यादों की तरह
    पुरानी अखबार का ढेर भी बड़ता जा रहा है
    इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है

    ...अच्छी हो या बुरी आदत पड गयी तो छोड़ना बच्चों का खेल नहीं... फिर भी अच्छी आदत ही साबित होती हैं..
    सुन्दर रचना..
    नववर्ष की आपको भी हार्दिक शुभकामनायें!

    जवाब देंहटाएं
  10. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है

    साये की तरह हमसफ़र हैं यादें ...
    बहुत खूबसूरती से यादों का साथ निभा रहे हैं आप ...

    जवाब देंहटाएं
  11. दराल साहब की टिपण्णी मेरी भी टिपण्णी समझी जाए :)

    जवाब देंहटाएं
  12. सुन्दर अहसास...

    नववर्ष की आपको भी हार्दिक शुभकामनायें!

    जवाब देंहटाएं
  13. ख़बरों के साथ
    तेरे एहसास को फ्लश आउट करने की कोशिश तो करता हूँ
    पर तभी चाय की खुशबू अपना असर दिखाना शुरू कर देती है

    क्या बात कही सर!
    गजब का लिखा है।


    सादर

    जवाब देंहटाएं
  14. हाहाहाहा
    कमबख्त अखबार 365 दिल छपता है....
    सुबह न सही, शाम को भी पढ़ने की आदत है....
    यानि फ्लैश आउट करना मुश्किल....
    नया या पुराना हो अखबार
    अखबार में कई पन्ने
    कमबख्त हर पन्ने में कई खबरें
    ....इसी तरह यादों का ढेर
    हर ढेर में कई यादें....
    कमबख्त करें भी तो क्या करें......
    हम तो ऐसे ही जीते हैं ....हाहाहाहाह

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.

    आपको आनेवाले नववर्ष की बहुत बहुत
    हार्दिक शुभकामनाएँ.

    जवाब देंहटाएं
  16. आदत से मजबूर है क्या करें .....

    जवाब देंहटाएं
  17. कुछ भाव , कुछ एहसास अलग होने या अलग किये जाने के लिये नहीं होते
    बहुत सुंदर !!

    नया साल आप को और आप के परिवार को बहुत बहुत मुबारक हो !!

    जवाब देंहटाएं
  18. अरे!!क्या बात है!!जबरदस्त लिखा है! :):)
    यादें ऐसी ही होती हैं...:)

    जवाब देंहटाएं
  19. अब तो ३६५ नहीं....२४*७ आती हैं....ख़बरें भी, वह भी !

    जवाब देंहटाएं
  20. मजेदार प्रस्तुति!...नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकामनाएं!

    जवाब देंहटाएं
  21. सुबह की अखबार के साथ
    तुम घर में घुसती हो
    तो तमाम कोशिशों के बावजूद निकलती नहीं

    sundar prastuti.

    जवाब देंहटाएं
  22. बेहतरीन
    वैसे एक नजरिया ये भी देखा जाए
    स्वपन मेरे : तेरा अहसास

    जवाब देंहटाएं
  23. कल 30/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  24. नए साल की शुभकामनाये बहुत बेहतरीन रचना लगी यह ...

    जवाब देंहटाएं
  25. बहुत सुंदर अंदाज में लिखी प्रेम कविता.. आदत ही पड़ जाती है...प्रेम की भी शायद, नए साल के लिये शुभकामना !

    जवाब देंहटाएं
  26. सुंदर अहसास बेहतरीन रचना,......
    नए साल की शुभकामनाए .......

    मेरे पोस्ट के लिए --"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"-- मे click करे

    जवाब देंहटाएं
  27. जिसमें खट्टी-मीठी यादों की ख़बरें होती है . बेहतरीन..

    जवाब देंहटाएं
  28. इतने लगाव वाले आदमी की नियती भी अलग होना ही है!

    जवाब देंहटाएं
  29. एक आदत सी हो गई है तू ,और आदत कभी नहीं जाती .चस्का ऐसी ही चीज़ है भाई साहब .कहा भी गया है हलवा सूजी का चस्का दूजी का और खबर .....दिगंबर नासवाभाई साहब 'पुरानी अखबार का ढेर भी बढ़ता जा रहा है 'कृपया बड़ता दुरुस्त कर लें .

    जवाब देंहटाएं
  30. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है………………गज़ब्……………क्या कहूँ इस अन्दाज़ पर्।

    जवाब देंहटाएं
  31. तेरी यादों की तरह
    पुरानी अखबार का ढेर भी बढ़ता जा रहा है
    beautiful poem

    जवाब देंहटाएं
  32. SPAST ABHIVYAKTI KE LIYE AAPKO
    BADHAAEE .

    NAYA SAAL AAP AUR SABKO MUBAARAK HO .

    जवाब देंहटाएं
  33. बहुत खूब...
    यादें वो शै हैं जो कभी जेहन से नहीं निकलतीं।
    इन्हें निकालने की कोई जरूरत भी नहीं, ये तो सहेज कर रखने की चीज़ें हैं।

    जवाब देंहटाएं
  34. वाह बहुत बेहतरीन और उम्दा रचना
    आभार !!


    मेरी नई रचना
    एक ख़्वाब जो पलकों पर ठहर जाता है

    जवाब देंहटाएं
  35. तेरी यादों की तरह
    पुरानी अखबार का ढेर भी बढ़ता जा रहा है

    Excellent... very touching...

    जवाब देंहटाएं
  36. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

    जवाब देंहटाएं
  37. तुम चुस्कियों के साथ
    मेरे जिस्म में उतरने लगती हो


    Behtareen, Laajawaab, Benamoon bhav...behad pasand aaya ye andaaz...

    www.poeticprakash.com

    जवाब देंहटाएं
  38. बहुत बढ़िया ...नए वर्ष की शुभकामनाएँ ।

    जवाब देंहटाएं
  39. बहुत सुंदर ...नए वर्ष की शुभकामनाएँ ...

    जवाब देंहटाएं
  40. बहुत खूब ... कलात्मक अंदाज़

    जवाब देंहटाएं
  41. सचमुच स्मृतियाँ एक दिन भी तो छुट्टी पर नहीं जातीं....
    अद्भुत रचना है सर....
    नव वर्ष की सादर शुभकामनाएं...

    जवाब देंहटाएं
  42. साधारण सी बात को कैसे विशिष्टता प्रदान की जाती है, ये आप से सीखना पड़ेगा दिगंबर भाई। बहुत बहुत आभार इस सुंदर कविता को पढ़वाने के लिए।

    आप को भी नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकामनाएं ...

    जवाब देंहटाएं
  43. namaskar digambar ji
    happy new year

    wah bahut hi khoobsurat subah , akhbaro ka der .....sabi ko umda prastut kiya , rachna padhte huye kab khatm ho gayi maloom hi nahi pada ...........aankho ke samne chitra ubhar rahe the nav varsh ka swagat kar rahe the ,.
    badhai. aapki lekhni bahut khubsurat hai .

    जवाब देंहटाएं
  44. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है



    वाह बहुत खूब .......३६५ दिन आने वाले अखबार की तरह ...ये यादे हर वक्त चली आती हैं ......

    जवाब देंहटाएं
  45. तुमसे अलग होने बाद
    कितनी बार तुमसे अलग होना चाहा
    पर हो न सका

    ye soch kar aasan lagt hai...
    lekin hota nahin hai.!

    जवाब देंहटाएं
  46. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है
    वाह..... बेहतरीन रचना
    vikram7: आ,मृग-जल से प्यास बुझा लें.....

    जवाब देंहटाएं
  47. याद जाती ही नही तो कोई आखिर क्या करे.

    बेहतरीन अति सुंदर.

    जवाब देंहटाएं
  48. आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को नव-वर्ष २०१२ की ढेरों शुभकामनाये,नासवा साहब !

    जवाब देंहटाएं
  49. chai beshak chhod do lekin yadon ke dher fir bhi u hi bante rahenge kyuki unhe chay ki nahi tumhare ehsaso ki nikoteen mil rahi hai.

    जवाब देंहटाएं
  50. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है
    वाह क्या कहने बढ़िया !

    जवाब देंहटाएं
  51. बेहतरीन .... लाजवाब . इस खुबसूरत रचना के लिए क्या कहूँ ......?आपको बधाई ....

    ....नव वर्ष की अग्रिम शुभ कामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  52. बहुत सुन्दर भाव लिए रचना |
    नव वर्ष शुभ और मंगलमय हो |
    आशा

    जवाब देंहटाएं
  53. बहुत खूब, जब कोई जीवन की खबर बन जाये तो नित्य पढ़ना ही पड़ेगा।

    जवाब देंहटाएं
  54. कल 31-12-2011को आपकी कोई पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  55. दिगंबर जी, आपसे ब्लॉग जगत में परिचय होना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है.बहुत कुछ सीखा और जाना है
    आपसे.इस माने में वर्ष
    २०११ मेरे लिए बहुत शुभ और अच्छा रहा.

    मैं दुआ और कामना करता हूँ की आनेवाला नववर्ष आपके हमारे जीवन
    में नित खुशहाली और मंगलकारी सन्देश लेकर आये.

    नववर्ष की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

    जवाब देंहटाएं
  56. नववर्ष की अनंत शुभकामनाओं के साथ बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  57. नव वर्ष की बहुत बहुत शुभ कामनाये

    सच कहा अखबार तो जीवन का हिस्सा बन गया है

    जवाब देंहटाएं
  58. NEW YEAR DAY... इस अवसर पर वश यही कहूँगा ---भगवान सभी के दिल में शांति और सहन की शक्ति दें ! मै और मेरी धर्मपत्नी की ओर से आप सभी को सपरिवार -नव वर्ष की शुभ कामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  59. बेहतरीन .... लाजवाब . ...

    ....नव वर्ष की शुभ कामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  60. आप को सपरिवार नव वर्ष 2012 की ढेरों शुभकामनाएं.

    इस रिश्ते को यूँ ही बनाए रखना,
    दिल मे यादो क चिराग जलाए रखना,
    बहुत प्यारा सफ़र रहा 2011 का,
    अपना साथ 2012 मे भी इस तहरे बनाए रखना,
    !! नया साल मुबारक !!

    आप को सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया, आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ, एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से नया साल मुबारक हो ॥


    सादर
    आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
    एक ब्लॉग सबका

    आज का आगरा

    जवाब देंहटाएं
  61. सुबह से शाम तुम्हारी गिरफ्त में
    कब दिन बीत जाता है पता नहीं चलता ......
    शानदार.

    जवाब देंहटाएं
  62. नया साल बहुत बहुत मुबारक.

    जवाब देंहटाएं
  63. प्यार ऊपर से किसी की याद शह ही ऐसी है -इश्क पर जोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब ,जो लगाए न लगे ,और बुझाए न बुझे ...और याद आके जाती कहाँ है ...तस्वीर उनकी उठाके ,रख दू जहां जी चाहे ...नव वर्ष मुबारक .जो आके न जाए वही तो याद होती है

    जवाब देंहटाएं
  64. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें...

    जवाब देंहटाएं
  65. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    नव वर्ष की शुभकामनायें|

    जवाब देंहटाएं
  66. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !

    जवाब देंहटाएं
  67. आपको पढे हुए बहुत दिन हो गए... आप से मिले हुए भी ..। आपको नववर्ष की मंगल कामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  68. इक बार को ये चाय की आदत तो छोड़ भी दूं
    पर इस अखबार का क्या करूं
    ये कमबख्त तो अब तीन सौ पैंसठ दिन
    छपने लगी है
    .... सुंदर प्रस्तुति ....

    जवाब देंहटाएं
  69. तुमसे अलग होने बाद
    कितनी बार तुमसे अलग होना चाहा
    पर हो न सका.सुंदर प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  70. चाय भी मूँह लगी है...छूटती कहाँ??

    नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकामनाएं ...

    जवाब देंहटाएं
  71. कुछ एहसासों को भूलना या ज़हन से निकालना मुमकिन नहीं है जनाब.. सत्य लिखा है..
    वो किसी न किसी तरह ज़िन्दगी में अटक ही जाती हैं..

    आभार
    प्यार में फर्क पर अपने विचार ज़रूर दें..

    जवाब देंहटाएं
  72. आप को होली की हार्दिक शुभकामनाएं...
    आप की ये रचना 29-03-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचलपर लिंक की जा रही है। आप भी इस हलचल में अवश्य शामिल होना।
    सूचनार्थ।

    जवाब देंहटाएं
  73. यह एक तेरा अहसास ही तो है,जो एक नशा बन गया है,भला यह रिश्ता अब थोड़े ही न छुटेगा फ्लेश आउट होगा भी कैसे ?

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है