मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

वो सूरज से बगावत कर रहा है ...

कविता के दौर से निकल कर पेश है एक गज़ल ... आशा है आपको पसंद आएगी ...

अंधेरों की हिफाज़त कर रहा है
वो सूरज से बगावत कर रहा है

अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
परिंदों से शराफत कर रहा है

खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
कोई दीपक हिमाकत कर रहा है

गली के मोड पर रखता है मटके
वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है

वो कहता है किताबों में सजा कर
के तितली पर इनायत कर रहा है

अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
परिंदों की शिकायत कर रहा है

बुजुर्गों को सरों पे है बिठाता
शुरू से वो ज़ियारत कर रहा है

68 टिप्‍पणियां:

  1. गली के मोड पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है
    बहुत सुन्दर !

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  2. वो कहता है किताबों में सजा कर
    के तितली पर इनायत कर रहा है
    बहुत खूब कहा है दिगंबर जी. बहुत सुंदर गजल है.

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  3. वाह!

    कमाल की प्रस्तुति है.
    निराला अंदाज,बहुत अच्छा लगा.

    आभार.

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  4. उफ़ …………आज तो निशब्द हूँ हर शेर कमाल कर रहा है।

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  5. पूरी गजल ही बेहतरीन ...

    खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है

    गली के मोड पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है

    बहुत खूब

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  6. सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  7. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है.

    बहुत सुंदर गज़ल. और भी शेर काबिले गौर हैं.

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  8. वाह - क्या बात है !
    आज आप मेरे नए ब्लॉग ( रेत के महल ) पर पहली बार आये हैं नासवा जी - आभार और स्वागत | आशा है आपको पसंद आया होगा और आगे भी आते रहेंगे |

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  9. अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है ||

    चुके होंगे तरकश के तीर
    अपनी उकताहट हर रहा है ||

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  10. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है

    वाह ! बहादुरी की मिसाल ।
    सुन्दर ग़ज़ल ।

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  11. http://dineshkidillagi.blogspot.in/2012/02/links.html
    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

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  12. अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है


    बेहतरीन.....लाजबाब

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  13. वो कहता है किताबों में सजा कर
    के तितली पर इनायत कर रहा है

    बेहद खूबसूरत गज़ल

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  14. अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है

    बहुत खूब! हरेक शेर एक कहानी कहता हुआ...बेहतरीन गज़ल..

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  15. अंधेरों की हिफाज़त कर रहा है
    वो सूरज से बगावत कर रहा है

    अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है
    Wah! Pooree gazal,gazab kee hai!

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  16. अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है ... उड़ने से पहले अतिरेक

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  17. समाज की विडम्बनाओं को इस ग़ज़ल में आपने बहुत ही सुंदर तरीक़े से अभिव्यक्ति दी है।

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  18. अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है

    जुर्रत तो देखिये बंदे की ..लाजबाब ग़ज़ल बेहतरीन शेयर!!

    बहुत खूब दिगंबर जी...बधाई

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  19. गली के मोड पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है
    वाह बहुट खूब लिखा है आपने यही तो साची इबादत है जनाब आपका यह अंदाज़ भी पसंद आया...शुभकामनायें

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  20. खूबसूरत अश'आरों से सजी पूरी एक खूबसूरत गज़ल
    मुबारक कबूल कर्रें !

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  21. बहुत दिनों बाद आप ग़ज़ल की दुनिया में वापस आए "ख़ुश आमदीद"
    बहुत ख़ूबसूरत मतले के साथ ये शेर

    गली के मोड़ पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है
    तो बेहद ख़ूबसूरत है
    मुबारक हो !!

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  22. गली के मोड पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है

    बेहद सुंदर...... वाह

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  23. वाह वाह...
    बेहतरीन गज़ल सर...
    अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है
    लाजवाब शेर...

    सादर.

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  24. अंधेरों की हिफाज़त कर रहा है
    वो सूरज से बगावत कर रहा है

    अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है
    behtrin gazal ,bahut din baad padhna hua ,mujhe bhi behad khushi hui aapke aane par

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  25. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है ....
    ऐसे ही दीपकों की जरूरत है आज दुनिया को।

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  26. अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है

    khoobsoorat hain sare hi sher....umda prastuti...

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  27. अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है

    बहुत खूब...सभी शेर अर्थपूर्ण,लाजवाब!

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  28. बेहतरीन गजल, बिना बगावत कुछ नहीं है

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  29. संपूर्ण गजल ही अर्थपूर्ण है किसे छोड़े किसे पकडे वाली बात है !
    किन्तु सबसे बेहतरीन पंक्तियाँ यह लगी .,,
    अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है

    शिकारी शराफत कर ही नहीं सकता
    बहुत सुंदर हर पंक्ति बधाई !

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  30. बहुत सुन्दर गजल... हर एक शेर कुछ कह रहा है....

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  31. गजल कहा जाय या सच्ची बानगी..बेहद खुबसूरत..

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  32. अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है
    वाह ...बहुत खूब ।

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  33. आज तो एक से एक बेहतरीन शेर कहें हैं आपने। बहुत ही श्रेष्‍ठ, मन तृप्‍त हो गया।

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  34. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है

    वो कहता है किताबों में सजा कर
    के तितली पर इनायत कर रहा है

    बुजुर्गों को सरों पे है बिठाता
    शुरू से वो ज़ियारत कर रहा है

    सुभान अल्लाह दिगंबर भाई...जिंदाबाद...क्या खूबसूरत शेर कहें हैं आपने...जिंदाबाद...जिंदाबाद ...ढेरो दाद कबूल करें

    नीरज

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  35. बहुत उम्दा गजल...हर शेर गहरा असर छोड़ जाता , अंतिम बहुत बेहतर है.

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  36. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है... वाह! बहुत उम्दा...

    गली के मोड पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है... कितना सुन्दर शेर... कबीर याद आगये 'राम' के लिए दुसाला बनाते...
    "जो डोलौं सो करौं परिक्रमा, जो कछु करौं सो सेवा.
    जो सोवौं सो करौं दंडवत पूजौं और ना देवा"

    बहुत सुन्दर ग़ज़ल सर....
    सादर.

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  37. बेहतरीन गज़ल। सभी शेर लाज़वाब हों ऐसा कम ही हो पाता है। वाह!

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  38. बहुत सुन्दर ...दरअसल अच्छाई की कद्र होनी चाहिए !

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  39. सुभाल्लाह.....खुबसूरत ग़ज़ल....दाद कबूल करें।

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  40. अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है ....
    behtarin gazal.....

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  41. बेहद खूबसूरत गज़ल । एक एक शेर मोती है ।

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  42. @वो कहता है किताबों में सजा कर
    के तितली पर इनायत कर रहा है

    लाजवाब!

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  43. UMDA GAZAL KE LIYE BADHAAEE AUR
    SHUBH KAMNA DIGAMBAR JI .

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  44. इस बहुत अच्छी ग़ज़ल का सबसे उम्दा शेर।
    सभी शेर काबिले-गौर हैं।

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  45. अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है

    खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है

    Naswa ji bilkul lajabab panktiyan ....saddar badhai.

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  46. सुंदर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  47. Lmbi bimari ke baad aap sabko padhne ka avsar mila...Bahut khub likha hai...
    अभी देखा हैं मैंने इक शिकारी
    परिंदों से शराफत कर रहा है

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  48. "अभी सीखा नहीं बंदे ने उड़ना
    परिंदों की शिकायत कर रहा है"

    काबिले तारीफ़....वाह..!!!.

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  49. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है
    गली के मोड पर रखता है मटके
    वो कुछ ऐसे इबादत कर रहा है,सबसे अलग हैयह शैर .आधुनिक चलन पर मिसायलदागतें हैं तमाम शैर .

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  50. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा है

    Awesome!!

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  51. इस गज़ल को फिर पढ़कर मस्त होने का मन हुआ।

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  52. खड़ा है आँधियों में टिमटिमाता
    कोई दीपक हिमाकत कर रहा
    हर शेर काबिल-ऐ-तारीफ है .

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  53. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद कबूल करें, हर शेर बब्बर शेर है...वाह...

    नीरज

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है