रविवार, 3 जून 2012

अम्मा ...


छुपा कर बेटे बहु से
वो आज भी सहेजती है
बासी अखबार
संभाल कर रखती है
पुरानी साडियां
जोड़ती रहती है
घर का टूटा सामान

सब से आँखों बचा कर
रोज देखती है खिडकी के बाहर
कान लगाये सुनती है
कुछ जानी पहचानी
कुछ अन्जानी सी आवाजें 

पर नहीं आती वो आवाज
जिसका रहता है इंतज़ार माँ को

“पुराने कपडे, पुराना सामान, रद्दी-अखबार दे दो
बदले में बर्तन ले लो”

इलाका तो वही है बरसों से
कुछ पडोसी भी वही हैं 
बस अम्मां समझ नहीं पाई
कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया 

गुज़रती उम्र के साथ
अम्मा की आदत भी तो नहीं छूटती ... 

85 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही विवरण दिया है आपने इस रचना में |
    आशा

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  2. समय-समय की बात है अब बहुत कुछ बदलता जारहा है..बस पुरानी यादें पुरानी बातें ही रह गई है..

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  3. इलाका तो वही है बरसों से
    कुछ पडोसी भी वही हैं
    बस अम्मां समझ नहीं पाई
    कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया ......
    kya khoob kaha hai sir....
    pyaari rachanaa

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  4. इलाका तो वही है बरसों से
    कुछ पडोसी भी वही हैं
    बस अम्मां समझ नहीं पाई
    कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया

    गुज़रती उम्र के साथ
    अम्मा की आदत भी तो नहीं छूटती ...


    सुंदर रचना व भावाभिव्यक्ति !!

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  5. बहुत ही सुन्दर कल्पना ....और कोमल भावनाएं...वास्तव में ...परिवेश बदल जाते हैं ....आदतें नहीं .....!

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  6. गुज़रती उम्र के साथ माँ की यादे हमेशा आती रहेगी,,,,

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,,,,,,

    RECENT POST .... काव्यान्जलि ...: अकेलापन,,,,,

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  9. उन्हीं के साथ बचा हुआ है थोड़ा पुरनपन और चीजों से लगाव !!

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  10. समय के साथ सब कुछ बदल गया है लेकिन यादों में वह अब भी बाकी है...बहुत प्यारी रचना...

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  11. एक एक चीज सहेजने की आदत तो वक्त सिखा जाता है।

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  12. आदते कहाँ बदल पाती हैं ...बस माहौल बदल जाता है ..सुन्दर अभिव्यक्ति

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  13. समय के साथ कितना कुछ बदल जाता है भाई साहब !
    रह जाती हैं तो बस यादें . लेकिन अम्मा तो समय के साथ बदल भी नहीं सकती .

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  14. बदल गया परिवेश... नहीं बदली कुछ बातें!

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  15. माँ के ममतामयी भोलेपन का सचित्र चित्रण !

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  16. अक्सर ऐसा होता है ....समय बदल जाता है नहीं बदलता तो वो समय जिसे बदलने में किसी की दुनिया ही बदल जाती है !

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  17. गुज़रती उम्र के साथ
    कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया ......
    पता ही नहीं चलता कैसे कब ज़िन्दगी गुजर जाती है ,एक लत ,एक आदत इन्सान को बूढ़ा नहीं होने देती,

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  18. बहुत कुछ वक्त बदलने पर भी नही बदलता।

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  19. पर नहीं आती वो आवाज
    जिसका रहता है इंतज़ार माँ को

    “पुराने कपडे, पुराना सामान, रद्दी-अखबार दे दो
    बदले में बर्तन ले लो”....... जाने क्यूँ आँखें डबडबा गयीं , कहाँ भटक गया सारा शहर !

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  20. "छुपा कर बेटे बहु से
    वो आज भी सहेजती है
    बासी अखबार
    संभाल कर रखती है
    पुरानी साडियां
    जोड़ती रहती है
    घर का टूटा सामान
    गुज़रती उम्र के साथ
    अम्मा की आदत भी तो नहीं छूटती ..."
    बहुत कुछ सोंचने पर विवश करती रचना...बहुत बहुत बधाई...

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  21. वो जो याद है अम्मी को
    याद करोगे कभी तुम भी!

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  22. सब कुछ बदल जाए पर अम्मा तो अम्मा ही रहेगी

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  23. बहुत बढिया! एक जीवन में कितना कुछ बदल जाता है, बस हम नहीं बदल पाते।

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  24. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  25. भावुक कर देने वाली अभिव्यक्ति !!!

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  26. अम्मा अम्मा है इसलिए वह तो सदियों से एक सी है। बाक़ी वे ... उनकी मनःस्थिति बदले, तब परिस्थिति बदले ।

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  27. अम्मा अम्मा है इसलिए वह तो सदियों से एक सी है। बाक़ी वे ... उनकी मनःस्थिति बदले, तब परिस्थिति बदले ।

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  28. अम्मा अम्मा है इसलिए वह तो सदियों से एक सी है। बाक़ी वे ... उनकी मनःस्थिति बदले, तब परिस्थिति बदले ।

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  29. देखा जाना सा..... हम भी यूँ ही सहेजना सीख जाते हैं वक़्त के साथ

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  30. नाजुक एहसास को अभिव्यक्त करने की कला कोई आपसे सीखे।...वाह!

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  31. सच में सब बदल गया मगर अम्मा नहीं बदलीं...हमारी भी ऐसी ही हैं अब तक.....

    सादर.

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  32. अम्मा का बार्टर सिस्टम शहर में है तो लेकिन रूपाकृति बदल के है .यहाँ ज़िंदा जिस्मों की अदला बदली होती है .पुराने जींस , कपडे पुराने सोफ्ट टॉय फुटपाथ पे बिक्तें हैं सोम बाज़ार में मिलतें हैं .बढ़िया बिम्ब अम्मा आज भी सहेजना चाहती है घर को दो पैसे का जुगाड़ हो घर के लिए .अम्मा हर दम घर का ही तो सोचती है .बढ़िया शब्द चीते भाव चित्र अम्मा का .

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  33. ये तो आज भाभी की फेस बुक पर देखकर कमेंट कर आये थे....मिलजुल कर लिख रहे हो क्या आजकल....:)

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  34. vahi aadat to amma ko amma banaye hue hai ...!!
    sundar bhaav ...
    shubhkamnayen .

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  35. इलाका तो वही है बरसों से
    कुछ पडोसी भी वही हैं
    बस अम्मां समझ नहीं पाई
    कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया

    गुज़रती उम्र के साथ
    अम्मा की आदत भी तो नहीं छूटती ...
    bahut sundar rachna ....

    जवाब देंहटाएं
  36. पर नहीं आती वो आवाज
    जिसका रहता है इंतज़ार माँ को

    बहुत बेह्तरीन अक्कासी की है आप ने माँ की
    बहुत उम्दा!!

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  37. बहुत बढ़िया... ये बदलाव हमारे भीतर के रस को भी सोख लेते हैं.. अम्मा की चाह सिर्फ पुरानी चीजों से बरतन बदलने की नहीं, बल्कि बरतन वाली से दो चार दुख सुख की बातें करने की भी होती हैं.. वह संवेदना ही खो गई है अब।

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  38. बस अम्मां समझ नहीं पाई
    कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया.....yahi to sach hai.....kho gaya muhalla.

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  39. बदलाव के साथ यादें और कुछ आदतें नहीं बदलती या यूँ कहिये जीवन का हिस्सा बन जाती हैं जिन्हें हम बदलना भी नहीं चाहते... सुन्दर भाव

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  40. मन को छूते हुए रचना के भाव ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  41. पुरानी यादों का ही तो सहारा होता है...महल्ले भले ही शहर बन जाएँ..पर यादें कहाँ जायेंगी..

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  42. बहुत सुन्दर प्रस्तुति... आभार

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  43. गुज़रती उम्र के साथ
    अम्मा की आदत भी तो नहीं छूटती ...

    जब यही सीखा है कि कोई चीज़ फालतू नही होती।


    सही कहा पुरानी आदतें कहां जाती हैं आसानी से ।

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  44. कोमल भावो की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति..सुन्दर ..

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  45. वाह क्या बात है सर जी....रचना के भाव पसंद आए!

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  46. अम्मा के अपने सुख हैं ...कौन ध्यान देता है !
    सादर

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  47. कुछ तो है जो समय से परे है..जैसे अम्मा ..सुन्दर रचना..

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  48. अपने बहुत ही अच्छी तरह से और सयुक्त सब्दो को सजोया है मन पर्फुलित होगया यहाँ आके
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/06/blog-post_04.html
    आप मेरे ब्लॉग पर आकर आपने प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद., आशा करता हूँ की आप आगे भी निरंतर आते रहेंगे
    आपका बहुत बहुत धयवाद
    दिनेश पारीक

    जवाब देंहटाएं
  49. अपने बहुत ही अच्छी तरह से और सयुक्त सब्दो को सजोया है मन पर्फुलित होगया यहाँ आके
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/06/blog-post_04.html
    आप मेरे ब्लॉग पर आकर आपने प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद., आशा करता हूँ की आप आगे भी निरंतर आते रहेंगे
    आपका बहुत बहुत धयवाद
    दिनेश पारीक

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  50. गुज़रती उम्र के साथ.....
    अम्मा के प्यार करने की आदत तो और पक्की हो जाती है ...बदलती तो औलाद है |
    नमन ऐसी माँ को ...
    शुभकामनाएँ!

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  51. भावपूर्ण उम्दा प्रस्तुति!

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  52. अम्मा तो अम्मा है , उनकी आदतें कहाँ छूटती हैं !
    लगता है हमारा शहर अभी महानगर नहीं बना , जब तक रद्दी वाले ,पुराने कपड़े के बदले बर्तन लेने वाले नजर आ जाते हैं अभी भी :)

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  53. बेहतरीन सुन्दर
    (अरुन =arunsblog.in)

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  54. शानदार भावों से सजी पोस्ट।

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  55. इलाका तो वही है बरसों से
    कुछ पडोसी भी वही हैं
    बस अम्मां समझ नहीं पाई
    कब मोहल्ला शहर में तब्दील हो गया
    और नासवा साहब अब तो शहर भी 'माल " हो रहें हैं अपनी पहचान खोके .शहर अपना होता था माल में वो बात कहाँ .अम्मा वही पुराना टूटे फूटे कांच के बदले नमक ढूंढती है . सिस्टम आज भी ढूंढती है .पुराने कपडे सहेज कर बेच आये उसका बस चले तो और दो पैसा घर ले आये .बढ़िया पोस्ट भाई साहब .शहर होना अपनी पहचान खोना है अपनापन खोना है एक के बाद एक शहरों का चेरा सपाट होने लगा है .

    देखते देखते शहर माल हो गए ,

    कुछ लोग बेहद मालामाल हो गए .

    झोपण सब बे हाल हो गए ......

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  56. शनिवार 09/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

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  57. sir
    maa apni dhroharon ko sadaiv sahej kar rakhti hai-----maato to maa hai na vo kaise bhul sakti hai apni in
    yaadon ko bahut bahut hi achhi abhivykti---shandaar
    poonam

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  58. इस नादान सी जिंदगी में बहुत सी बाते और यादे कभी पीछा नहीं छोड़ सकती .....

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  59. Diganmbar sahib,

    very nice touching representing true sentiments of a mother.

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  60. अम्मा कहाँ बदलने वाली हैं .....ज़माना बदल गया पर ...... बहुत मर्मस्पर्शी रचना

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  61. बहूत सुंदर मार्मिक अभिव्यक्ती....

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  62. एक छोटी सी बात को आपने कितने सुन्दर तरीके से कहा है.

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  63. इलाका तो वही है बरसों से
    कुछ पडोसी भी वही हैं
    बस अम्मां समझ नहीं पाई
    कब मोहल्ला शहर में तब्दी
    ल हो गया
    भाई साहब दुखद लेकिन सत्य ,अम्मा बाबूजी आज खुद रद्दी अखबार हो गएँ हैं ,पुराने केलेंडर की तरह दीवार पर टंगे नै तारीक बतलाने में असमर्थ .नासवा साहब आपकी ब्लॉग दस्तक अतिरिक्त उत्साह से भर भर जाती है .लेखन की आंच बन बन आती है .

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  64. सर जी...क्या लिखूं..? दिल को झकझोर कर रख दिया आपने....आपको हार्दिक शुभकामनाएँ....

    जवाब देंहटाएं
  65. बहुत सुन्दर.... यादो से बचना मुश्किल है !

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  66. कस्बे शहर जाएँ फिर भी....अम्मा सब जानती है. सुंदर रचना.

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  67. ’गुज़रती उम्र के साथ
    अम्मा की आदत भी तो नहीं छूटती’
    यादों के लम्हें जी लिये,आपके साथ,सादर आभार.

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  68. बहुत सुन्दर.
    अम्मा बेचारी
    आदत से मजबूर.

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है