रविवार, 5 अगस्त 2012

कैसी है तेरी सरहद ...


कविताओं के दौर से निकल के पेश है आज एक गज़ल ... आशा है पसंद आएगी ...

चाहे मेरा जितना कद  
पर बापू तू है बरगद  

बंटवारे का खेल हुवा 
खींची अपनी अपनी हद     

बेटे ने बस पूछ लिया  
अम्मा है कितनी गदगद   

जूते चप्पल चलते हैं 
कैसी है अपनी संसद 

अंदर आना नामुमकिन   
कैसी है तेरी सरहद 

82 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर गज़ल......
    एक शेर मेरी और से भी :-)

    मंदिर मस्जिद आजू-बाजू
    लगता अमन की है आमद
    सादर
    अनु

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  2. दयानिधि वत्स5 अगस्त 2012 को 5:08 pm

    बहुत अच्छा लगा पढकर.

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  3. चाहे मेरा जितना कद
    पर बापू तू है बरगद

    गहरी बात कहती सुन्दर गज़ल

    जवाब देंहटाएं
  4. हमने सबकी बात सुनी,
    इसकी भी होती है हद !

    जवाब देंहटाएं
  5. छोटी बह्र, बड़ी गजल... वाह!

    कहाँ तलक है उनकी ज़द
    ढूंढ़ के हारा मैं बेहद
    मुल्क सुखी सपना देखा
    ऐसा भी होगा शायद. (गुस्ताखी माफ़ सर)

    सादर.

    जवाब देंहटाएं
  6. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद

    दिल के करीब का लेखन...बहुत खूब...

    जवाब देंहटाएं
  7. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद

    ओह !! बड़ी मार्मिक पंक्ति है..
    सारे ही शेर बढ़िया हैं..

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह भाई वाह |
    शुभकामनायें ||

    जवाब देंहटाएं
  9. बापू के सपनों का ये कैसा भारत !
    काफी सुंदर गजल !
    शुभकामनाएँ !

    जवाब देंहटाएं
  10. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद ..

    क्या कहने ..

    थोड़े शब्दों में बहुत - कुछ कहती है यह ग़ज़ल.
    उम्दा प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  11. सत्यता दर्शाती, बहुत सुंदर रचना...!
    ~बचपन हाथ से फिसल गया है...
    बड़े भी खोजें अपना पद....~
    -सादर !!!

    जवाब देंहटाएं
  12. छोटी बहर की बहुत उम्दा ग़ज़ल लिखी है आपने!
    ✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮
    ~~♥ मित्रतादिवस की शुभकामनाएँ ! ♥~~
    ✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮
    ________/)______./¯"""/')
    ¯¯¯¯¯¯¯¯¯\)¯¯¯¯¯'\_„„„„\)

    जवाब देंहटाएं
  13. अंदर आना नामुमकिन
    कैसी है तेरी सरहद

    waah bahut sundar gajal likhi aapne gahan umda bhav liye huye ..badhai aapko digambar ji

    जवाब देंहटाएं
  14. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद वाह बहुत खूब ...

    आगे भी सबकी टिप्पणियाँ और अधिक सुन्दर कर गयी इस गजल को .....

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत दिनों के बाद पढ़ा
    अंतर्मन अब है गदगद

    बेहतरीन गज़ल, वाह !!!!!!!!!!!!

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  16. बड़े प्रभावी ढंग से व्यक्त किया है स्वयं को।

    जवाब देंहटाएं
  17. कविता से गज़ल में वापस वाह वाह क्या बात है.

    बहुत सुंदर गज़ल और बढ़िया कटाक्ष भी.

    अभिनन्दन.

    जवाब देंहटाएं
  18. बंटवारे का खेल हुवा
    खींची अपनी अपनी हद..bahut khoob waah!!

    जवाब देंहटाएं
  19. चाहे मेरा जितना कद
    पर बापू तू है बरगद
    हर पंक्ति सुंदर ...अच्छी गजल है !

    जवाब देंहटाएं
  20. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद

    माँ तो ज़रा सी बात पर ही गदगद हो जाती हैं .... बहुत खूबसूरत गज़ल

    जवाब देंहटाएं
  21. छोटी बह्र में ग़ज़ल कहने की आपमें माहरत हासिल हो चुकी है .
    बेहतरीन प्रस्तुति .

    जवाब देंहटाएं
  22. सुंदर पंक्तियों से सजी भाव पूर्ण लाजबाब गजल,,बधाई,

    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

    जवाब देंहटाएं
  23. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद

    Kya baat...Bahut Sunder

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  24. चाहे मेरा जितना कद
    पर बापू तू है बरगद

    बहुत खूब, थोड़ा हम भी जोड़ लेते है !

    यहाँ उतना वो बलशाली है,
    जितनी जिसकी मारक जद!

    भद्र मांगे है कपड़ा रोटी,
    कुटिल की है लम्बी मद !

    प्रज्ञं सब बेकार घूम रहे,
    टुच्चे पा रहे ऊँचे पद !

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  25. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद..बहुत गहन, सुन्दर भाव..

    जवाब देंहटाएं
  26. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद ..
    क्‍या बात है ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

    आभार

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  27. जूते चप्पल चलते हैं कैसी है अपनी संसद ....
    Kya khub likhte hain aap bhi ...
    Behatreen rachna ke liye shukriya..

    जवाब देंहटाएं
  28. हम तो आपके इस पहलू से अपरिचित थे दिगंबर भाई.. आप इस कदर हलकी-फुल्की गज़ल भी उतनी ही गहराई से कह लेते हैं जितनी आसानी से आपकी दीगर गज़लें होती हैं!!
    बहुत खूब!!

    जवाब देंहटाएं
  29. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा कितनी है गद गद ।

    क्या खूब लिखते हे सर ।

    जवाब देंहटाएं
  30. भाई दिगम्बर जी बहुत ही उम्दा गज़ल बधाई |

    जवाब देंहटाएं
  31. सरहद के अन्दर डायरेक्ट आना मना है , अप्रत्यक्ष रूप से तो हजारों पहुँच चुके !
    बढ़िया ग़ज़ल !

    जवाब देंहटाएं
  32. चाहे मेरा जितना कद
    पर बापू तू है बरगद bahut sunder line.....

    जवाब देंहटाएं
  33. वाह! दिगम्बर जी,बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने.
    सरल और गहन का अनूठा दर्शन.

    जवाब देंहटाएं
  34. यथार्थ को दर्शाती बेहतरीन गज़ल...

    जवाब देंहटाएं
  35. कल 08/08/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' भूल-भुलैया देखी है ''

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  36. जूते चप्पल चलते हैं
    कैसी है अपनी संसद
    जूते चप्पल चलते हैं
    कैसी है अपनी संसद
    बोंजाई (बोनसाई )लेके फिरते ,
    सबके अपने हैं बरगद .
    आज के राजनीतिक विद्रूप और कुरूपता की अच्छी खबर ली है .
    ram ram bhai
    मंगलवार, 7 अगस्त 2012
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

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  37. बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित .....

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  38. थोडे शब्दों में बहुत कुछ कह दिया.
    बूंद में सागर.

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  39. क्या खूब ग़ज़ल कही है.. हर पंक्ति गहन!

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  40. joote chappal chalte hai k c hai apni sansad...
    kitne kam shabdon ki gahri gazal....

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  41. खुबसूरत है ग़ज़ल।

    जवाब देंहटाएं
  42. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद
    ये पंक्तियाँ आज के सामाजिक संबंधों की टीस को कह जाती हैं. बहुत बढ़िया ग़ज़ल दिगंबर जी.

    जवाब देंहटाएं
  43. नासवा जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'स्वप्न मेरे' से कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 8 अगस्त को 'कैसी है तेरी सरहद...' शीर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद
    फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

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  44. लिए हुए सब पासे हैं ,
    कितने हैं शकुनी संसद .
    भाई साहब काइरोप्रेक्टिक पर अब पूरी श्रृंखला चलेगी अगला आलेख होगा Women's Wellness /chiropractic bringing out the best in you /Any women suffering from gynecological problems needs a chiropractic examination .All sexual organs and organs of reproduction need a healthy nerve supply tofunction properly.

    जवाब देंहटाएं
  45. चाहे मेरा जितना कद
    पर बापू तू है बरगद

    बंटवारे का खेल हुवा
    खींची अपनी अपनी हद

    बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद
    ..........खुबसूरत ग़ज़ल।

    जवाब देंहटाएं
  46. सभी शेर बहुत बढ़िया, ये ख़ास लगे...

    चाहे मेरा जितना कद
    पर बापू तू है बरगद

    बंटवारे का खेल हुवा
    खींची अपनी अपनी हद

    जवाब देंहटाएं
  47. आज के हालत देख शायद बापू ऊपर बैठ चुपचाप आसूं बहते होगें..
    बहुत बढ़िया उम्दा प्रस्तुति .आभार

    जवाब देंहटाएं
  48. बहुत अच्छी अभिव्यक्ति .......

    जवाब देंहटाएं
  49. ANDAR AANAA NAMUMKIN HAI
    KAESEE HAI TEREE SARHAD

    WAH ! DIGAMBAR JI , KYA SAADAA
    SHABDON KAA LIBAAS PAHNAAYA HAI AAPNE
    BHAVON KO !! SUNDAR , ATI SUNDAR .

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  50. बंटवारे का खेल हुवा
    खींची अपनी अपनी हद

    बहुत सुन्दर !

    जवाब देंहटाएं
  51. .नासवा साहब सालाना व्यापक चिकित्सा जांच में रीढ़ की जांच भी शामिल रखी जाए ताकि संभावित सब -लक-सेशंस (रीढ़ विक्षोभ /विरूपण )की जांच और तदनंतर समाधान मिल सके .

    जवाब देंहटाएं
  52. बेटे ने बस पूछ लिया
    अम्मा है कितनी गदगद

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    जवाब देंहटाएं
  53. शब्द शब्द अपने आप में भाव समेटे हुए

    जवाब देंहटाएं
  54. शब्द शब्द अपने आप में भाव समेटे हुए

    जवाब देंहटाएं
  55. शब्द शब्द अपने आप में भाव समेटे हुए

    जवाब देंहटाएं
  56. शब्द शब्द अपने आप में भाव समेटे हुए

    जवाब देंहटाएं
  57. कमाल की ग़ज़ल है...
    Simple and yet so beautiful :)

    जवाब देंहटाएं
  58. छोटी बहर की बेहतरीन ग़ज़ल

    जवाब देंहटाएं
  59. जूते चप्पल चलते हैं
    कैसी है अपनी संसद

    अंदर आना नामुमकिन
    कैसी है तेरी सरहद

    waah bahut khoob, padhna man bhaya

    shubhkamnayen

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है