सोमवार, 13 अगस्त 2012

सुख दुःख से जब परे हुए हो ...


सब से परदा करे हुए हो   
तन्हाई में घिरे हुए हो   

पत्तों से ये हवा ने बोला     
पतझड़ से क्यों डरे हुए हो   

भाव नहीं है दया का दिल में 
अंदर से क्या मरे हुए हो 

संगी साथी नहीं रहेंगे  
गुस्से से जो भरे हुए हो 

बदकिस्मत हो तभी तो अपनी   
डाली से यूं झरे हुए हो 

जीवन उस दिन समझ सकोगे 
सुख दुःख से जब परे हुए हो  

82 टिप्‍पणियां:

  1. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो

    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो
    गहन भाव लिए बेहतरीन प्रस्‍तुति ... आभार

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  2. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो
    सच कहा ....सुंदर गजल है !

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  3. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो ....बेहतरीन है यह इस रचना में ..यही डर मन में छिपे भावों को खोल के रख देता है ..सुन्दर ...बहुत बढ़िया ..

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  4. वाह...
    पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो ...
    बेहतरीन....बेहद खूबसूरत गज़ल.

    सादर
    अनु

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  5. वाह आदरणीय दिगम्बर जी कितनी खुबसूरत रचना रच डाली , बधाई स्वीकार करें

    जवाब देंहटाएं
  6. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो ...बहुत गहन अभिव्यक्ति..

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  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १४/८/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है|

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  8. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो

    मानव जीवन एक इस सूत्र से ही जुड़ा है महाप्रयाण ka वह सफ़र .

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  9. बहुत सुन्दर ग़ज़ल दिगंबर भाई . हर पंक्ति कुछ सन्देश देती हुई .

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  10. क्या बात है भाई जी --

    पीले पत्ते नीचे गिरते -
    घाव आज भी हरे भरे हैं |

    परदे में क्या शक्ल धरे वे-
    बदकिस्मत हम मरे मरे हैं |

    हरियाली जो तनिक दिखी तो
    रविकर पशुता चरे धरे है |

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  11. सुन्दर ग़ज़ल .
    आइना दिखाती हुई .

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  12. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो

    खुबसूरत रचना ........

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  13. जीवन के गहन सत्यों को उजागर करती रचना...

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  14. कमाल की गज़ल है.. रूमानियत से परे भी इतनी खूबसूरत गज़ल.. कम्माल!!

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  15. भावो का सुन्दर समायोजन......

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  16. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो

    खुबसूरत रचना .............आभार

    जवाब देंहटाएं
  17. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो

    बहुत खूब, नासवा जी,
    फलसफाई रंग में डूबी हुई बेमिसाल ग़ज़ल।

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  18. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो
    सत्य है

    जवाब देंहटाएं
  19. बदकिस्मत हो तभी तो अपनी
    डाली से यूं झरे हुए हो,,,,,

    खूबसूरत गज़ल.बेहतरीन रचना,,,, दिगम्बर जी,,बधाई,,
    स्वतंत्रता दिवस बहुत२ बधाई,एवं शुभकामनाए,,,,,
    RECENT POST ...: पांच सौ के नोट में.....

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  20. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो
    खूबसूरत सन्देश और सटीक
    बधाई
    भ्रमर ५

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  21. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो

    वाह.. सच कहा...

    जवाब देंहटाएं
  22. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो

    बहुत सुंदर और सार्थक सीख देती गज़ल

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  23. सुख-दुख से परे होकर देखने से तो जीवन का रहस्य और सच सामने आ जात है।

    जवाब देंहटाएं
  24. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो

    बहुत खूबसूरत गज़ल

    जवाब देंहटाएं
  25. आपकी ग़ज़ल तो चुप कर देती है बस!!

    जवाब देंहटाएं
  26. आदरणीय नासवा जी
    नमस्कार !
    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो
    .....गहन भाव
    पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो ...
    बेहतरीन....बेहद खूबसूरत गज़ल.... आभार

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  27. जीवन उस दिन समझ सकोगे , सुख दुःख से जब परे हुए हो !
    सत्य है मगर यह इतना सरल कहाँ !

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  28. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो
    waah!bahut hi Umda khyal hai!
    dukh-sukh mei ek samaan rahne ka sandesh deti hai.

    Badhiya lagi ghzal.

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  29. श्री दिगम्बर नासवा जी की ज़ुबानी ...
    तन्हाई की सच्ची और सटीक कहानी !!!

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  30. और बिना गिरे खड़े हुए हो...बहुत ही बढ़िया..

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  31. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो
    दो पंक्तियों में जीवन का सार भर दिया है आपने ... सुन्दर भाव ... आभार

    जवाब देंहटाएं
  32. बहुत कुछ कह दिया -
    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो

    जवाब देंहटाएं

  33. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो
    तेज़ हवा ने हमसे पूछा ,रेत पे क्या लिखते रहते हो ,
    राजनीति बदजात है भैया ,किस किस का पानी भरते हो .
    छोटी बहर की ला -ज़वाब रचना .

    जवाब देंहटाएं

  34. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो
    तेज़ हवा ने हमसे पूछा ,रेत पे क्या लिखते रहते हो ,
    राजनीति बदजात है भैया ,किस किस का पानी भरते हो .
    छोटी बहर की ला -ज़वाब रचना .

    जवाब देंहटाएं
  35. बदकिस्मत हो तभी तो अपनी
    डाली से यूं झरे हुए हो


    बहुत खूब! क्या बात है!

    जवाब देंहटाएं
  36. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो

    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    बहुत खूब ग़ज़ल कही है भाई दिगंबर नासवा जी! अलग लबो-लहजा....अनुभूतियों की गहराई...गज़ब...मुबारक हो!.

    जवाब देंहटाएं
  37. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो

    गज़ब की अभिव्यक्ति !!
    पूरी ही ग़ज़ल बहुत सुन्दर !!

    जवाब देंहटाएं

  38. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो
    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    भाव देश का मरा हुआ है ,इटली का पानी भरते हो ..पूँजी सारी उठा देश की, स्विस में जाकर के रखते हो..यौमे आज़ादी मुबारक ,पीजा पास्ता मुबारक ,, .अच्छी प्रस्तुति . यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    बुधवार, 15 अगस्त 2012
    TMJ Syndrome
    TMJ Syndrome

    जवाब देंहटाएं

  39. संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो
    सही कहा ।

    बहुत बढिया गज़ल ।

    जवाब देंहटाएं
  40. जीवन समझा वही कहेगा
    सुख दुःख से जो परे हुए हो।
    ...वाह!

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  41. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो
    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो
    वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

    जवाब देंहटाएं
  42. बहुत ही धीर अभिव्यक्ति……

    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    जवाब देंहटाएं
  43. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो ...
    बेहतरीन. खूबसूरत .

    जवाब देंहटाएं
  44. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो
    ........यही सच है जीवन का ... हर कदम पर डर ही जीवन बन गया है .....

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  45. रचना पढ़कर लगा हमें यूँ
    भावों से ज्यों भरे हुए हों...

    सुन्दर भाव...

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  46. जीवन उस दिन समझ सकोगे
    सुख दुःख से जब परे हुए हो

    ....बहुत खूब! प्रेरक भावों से ओतप्रोत बेहतरीन गज़ल..

    जवाब देंहटाएं
  47. बहुत सुन्दर ग़ज़ल सार्थक सन्देश देती हुयी.
    आभार

    जवाब देंहटाएं
  48. संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो

    bilkul sahi baat... saral, sunder rachna
    shubhkamnayen

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  49. वाकई लाजबाब प्रस्तुति !
    हर पंक्ति छूती चली गई !
    आभार !

    जवाब देंहटाएं
  50. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो
    वाह...
    संगी साथी नहीं रहेंगे
    गुस्से से जो भरे हुए हो
    कितनी खूबसूरती से कह गए आप नासवा जी.
    ईद की मुबारकबाद.

    जवाब देंहटाएं
  51. बाऊ जी,
    उद्वेलित करती रचना...
    आशीष
    --
    द टूरिस्ट!!!

    जवाब देंहटाएं
  52. अत्‍यंत सुंदर गजल कही है आपने। बधाई।

    ईद की दिली मुबारकबाद।
    ............
    हर अदा पर निसार हो जाएँ...

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  53. उत्कृष्ट रचना ...
    बधाई दिगंबर भाई !

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  54. ’जीवन उस समय समझ सकोगे
    सुख दुख से जब परे हुए’
    सत्य-कथन

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  55. क्यों बनकर रहते रिमोट हो ,इतना किससे डरे हुए हो .....बढ़िया प्रस्तुति है आपकी बारहा पढ़ा है हर बार नया लुत्फ़ लिया है ... .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    सर्दी -जुकाम ,फ्ल्यू से बचाव के लिए भी काइरोप्रेक्टिक

    जवाब देंहटाएं
  56. भाई दिगम्बर नासवा जी नमस्ते अच्छी कविता |ब्लॉग पर पधारने के लिए आभार |

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  57. सचमुच ! कभी कभी निरपेक्षता ही एकमात्र सहारा है !

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  58. अंतिम शेर में जीवन का सार है... सुन्दर.. बहुत सुन्दर..

    जवाब देंहटाएं

  59. अर्थ शास्त्र के ग्यानी पंडित ,
    शास्त्रार्थ से पिटे हुए हो ..

    जवाब देंहटाएं
  60. पत्तों से ये हवा ने बोला
    पतझड़ से क्यों डरे हुए हो

    भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    बेहतरीन प्रस्‍तुति। धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  61. बदकिस्मत हो तभी तो अपनी
    डाली से यूं झरे हुए हो
    कम शब्दों में बड़ी और गहरी बात कह देना कोई आपसे सीखे।

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  62. तू है या एहसास तेरा
    या मेरे मन का वहम है
    दूर होते ही ये जाना ,
    तेरा ही रहमो -करम है ,
    आज यूं ही आँख नम है .
    ज़िन्दगी में कुछ तो गम हैं ,
    शेष अपनों का सितम हैं .
    निगहबानी फिर भी कम है .

    अब न बाकी कुछ भरम हैं ,
    उनसे मिलना बहुत कम है .
    नासवा साहब आप की यह रचना हम जैसों से भी कुछ उलटा सीधा लिखवा देती .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    मंगलवार, 28 अगस्त 2012
    आओ पहले बहस करो
    http://veerubhai1947.blogspot.com//
    Hip ,Sacroiliac Leg Problems
    Hip ,Sacroiliac Leg Problems/http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2012/08/hip-sacroiliac-leg-problems_28.html

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  68. भाव नहीं है दया का दिल में
    अंदर से क्या मरे हुए हो

    मानव को इससे बेहतर चुनौती नहीं दी जा सकती. बहुत खूब.

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है