मंगलवार, 4 सितंबर 2012

अजब ये सिलसिला क्यों ...


इरादा बुलबुला क्यों 
अजब ये सिलसिला क्यों   
  
झड़े पतझड़ में पत्ते 
हवा से है गिला क्यों 

फटे हैं जेब सारे 
हवा में है किला क्यों 

गए जो खुदकशी को 
उन्हें तिनका मिला क्यों 

शहर में दिन दहाड़े 
लुटा ये काफिला क्यों 

विरह की आग में फिर   
तपे बस उर्मिला क्यों 

छला तो इंद्र ने था 
अहिल्या ही शिला क्यों  

65 टिप्‍पणियां:

  1. भरी है तिजोरी तेरी
    फिर ईमान हिला क्यों
    :-)
    वाह...
    बढ़िया गज़ल...

    सादर
    अनु

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  2. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    वाह ! बहुत सुंदर प्रतीक...

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  3. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों ... राम के आगमन के लिए

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  4. bauhat khoob!!

    भरी है तिजोरी तेरी
    फिर ईमान हिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों
    waah!!

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  5. खिला-खिला सेठ है,
    श्रमिक है बुझा-बुझा क्यों

    जीना दुश्वार हो रहा
    मौत सस्ती यहाँ क्यों

    सचमुच बहुत अजब है ये सिलसिले...

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  6. बहुत-बहुत बेहतरीन प्रस्तुति ...
    बहुत सुंदर रचना....
    .....................................
    .....................................

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  7. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों ..wajib swaal bahut sundar rachna .......

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  8. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    बहुत ही प्रभावी..

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  9. गए जो खुदकशी को
    उन्हें तिनका मिला क्यों
    vaah ........gazab

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  10. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

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  11. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों
    बेहद सशक्‍त भाव ... आभार इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिए

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  12. बेहतरीन गज़ल। हर शेर एक तीखे सवाल छोड़ जाती है। सबसे तीखा सवाल तो यह है, जिसे सुनकर देवता भी गूंगे बन जाते हैं....

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों?

    ..गज़ब!

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  13. छला तो इन्द्र ने था शिला अहिल्या ही क्यों ..
    वाजिब सवालों में गढ़ दी सुन्दर ग़ज़ल !

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  14. बहुत सुन्दर ग़ज़ल .
    बेहतरीन .

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  15. शहर में दिन दहाड़े
    लुटा ये काफिला क्यों
    सियासी कोठरी में ,
    ये कालिख इतनी क्यों है .
    भरो इटली का पानी ,
    ये मजबूरी ही क्यों है ?
    बढ़िया गजल -हर अशआर एक व्यंजना लिए है -

    फटे हैं जेब सारे
    हवा में है किला क्यों
    किले से लाल भाषण ,
    अजब ,ये सिलसिला क्यों ?

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  16. '..अहिल्या ही शिला क्यों '

    बहुत ही खूबसूरत लिखा है.

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  17. उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति....

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  18. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    गज़ब कि अभिव्यक्ति

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  19. अजब ये सिलसिला क्यों..बेहतरीन/ हमेशा की तरह/ लम्बे समय बाद आया हूँ.../ और तृप्त भी हुआ/

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  20. जहाँ उत्तर न वकोई ,
    सवाली सिलसिला क्यों !

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  21. जहाँ उत्तर न कोई ,
    सवाली सिलसिला क्यों !

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  22. बहुत तीखे और सटीक सवाल कर दिए हैं आपने ...

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  23. झड़े पतझड़ में पत्ते
    हवा से है गिला क्यों
    ********
    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों
    *********

    ऐसे प्रश्न बहुत बार मन में उठते हैं ......पर जवाब ?
    बहुत खूबसूरत गज़ल

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  24. वाह बेहतरीन ग़ज़ल, मन को छू गयी

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  25. ये 'क्यों' कुछ बताता क्यों नहीं..?

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  26. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    ....बहुत सटीक प्रश्न उठाती बेहतरीन गज़ल...

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  27. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों ...वाह बहुत सुन्दर..

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  28. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों .....बहुत सुन्दर

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  29. ये आरक्षण बला क्यों है ?
    चला ये सिलसिला क्यों है ?
    बदलते रंग पत्ते ,
    पतझड़ से गिला क्यों है ?

    गंधाती अब सियासत ,
    चयन से गिला क्यों है ?
    बिकाऊ वोट तेरा ,
    फिर मांझी से गिला क्यों है ?

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  30. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    वाह ।

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  31. आप को पढना हमेशा ही सुखद लगता है .....
    खुश रहो!

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  32. समय का फेर है सब.
    सुन्दर ग़ज़ल के लिए आभार !

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  33. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों
    behad sateek prashan...

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  34. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    शायद हर नारी के मन में यही प्रश्न है जिसे आप ने शब्द दे दिये हैं
    बहुत सुंदर और स्वाभाविक अभिव्यक्ति !!
    बधाई !!

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  35. ये मौसम चुलबुला क्यों ,हवा को इत्तला क्यों ,
    हुई चिठ्ठों में खटपट ,रिसालों को पता क्यों ..... नारी शक्ति :भर लो झोली सम्पूरण से
    नारी शक्ति :भर लो झोली सम्पूरण से

    आधी दुनिया के लिए सम्पूरण -पूरी तरह स्वस्थ रहे आधी दुनिया इसके लिए ज़रूरी है देहयष्टि की बस थोड़ी ज्यादा निगरानी ,रखरखाव की ओर थोड़ा सा ध्यान और .बस पुष्टिकर तत्वों को नजर अंदाज़ न करें .सुखी स्वस्थ परिवार के लिए इन खुराकी सम्पूरकों पर थोड़ा गौर कर लें:


    रविकर फैजाबादी
    चुस्त धुरी परिवार की, पर सब कुछ मत वार |
    देहयष्टि का ध्यान कर, सेहत घर-संसार |
    सेहत घर-संसार, स्वस्थ जब खुद न होगी |
    सन्तति पति घरबार, भला हों कहाँ निरोगी ?
    संरचना मजबूत, हाजमा ठीक राखिये |
    सक्रिय रहे दिमाग, पदारथ सकल चाखिये ||

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  36. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों...
    दिगम्बर जी in पंक्तियों के लिए आपको प्रणाम... यूँ तो सभी पंक्तियाँ बहुत शानदार हैं

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  37. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों....उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.

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  38. वाह बहुत खूब।

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  39. इंद्र ने शाप तो झेला था बरसों तक.....पर अहिल्या को सजा क्यों..ये समझ नहीं आया।

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  40. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों
    LAJABAB GAJAL DIGAMBAR JI ....SADAR BADHAI

    जवाब देंहटाएं
  41. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    छोटी बह्र में भी आपने कमाल कर दिखाया .....:))

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  42. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों


    सही कहा है आपने ....आज भी तो नारी को ही हर परीक्षा से गुज़रना पड़ता हैं ...

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  43. अज़ब ये सिलसिला क्यूं है—
    विरोधाभासों के बोझों से—
    दबी जिंदगी सिसकती क्यूं है
    इंद्रधनुष देखने को उठती हैं नज़र
    स्याह बादलों से घिरा,आसमान क्यूं है--

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  44. ऐसे पौराणिक बिंबों वाली ग़ज़लें इन दिनों कम देखने में आई हें.

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    ये अर्थ को संपूर्णता देती पंक्तियाँ है. बहुत खूब कहा है.

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  45. क्यों का जवाब वाकई बहुत मुश्किल है..ग़ज़ल है या सच को सामने लाती एक रचना..दिगंबर जी काफी दिनों के बाद आपकी रचना पढ़ने को मिली..फिर से वही ताजगी और वही काव्य की सुगंध..खुबसूरत ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई..

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  46. ये मेरे ही शहर में हुआ ये बलबला क्यों ?
    ये मेरे ही नगर में सुनामी जलजला क्यों ?
    है मुश्किल हर डगर मेंअजब ये सिलसिला क्यों ?

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  47. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों?

    ..यह शेर तो सभी के दिल में उतर गया। महफिल लूट ली इसने। वाकई है भी यह कमाल। बहुत बधाई।

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  48. बड़ी बड़ी बातें छोटे बहर में...

    बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल !!

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  49. गए जो खुदकशी को
    उन्हें तिनका मिला क्यों

    विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    इन तीनों अश'आरों पर हमारी खास दाद कबूल करें.

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  50. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों
    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों
    ...जिस पर जोर चल जाय वही दोषी है यही दस्तूर चला आ रहा है
    बहुत बढ़िया चिंतनशील प्रस्तुति

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  51. हुआ इस देश को क्या ?
    मरी संवेदना क्यों ?

    .... ..ram ram bhai

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  52. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों


    बेहतरीन ग़ज़ल

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  53. विरह की आग में फिर
    तपे बस उर्मिला क्यों

    छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों

    बहुत खूब!!

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  54. छला तो इंद्र ने था
    अहिल्या ही शिला क्यों !

    क्या बात कही सर !

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है