सोमवार, 7 जुलाई 2014

खटखटाते रहो, खटखटाते रहो ...

प्रेम का गीत है, गीत गाते रहो
गुनगुनाते रहो, गुनगुनाते रहो

तितलियों ने कहा, फूल को चूम कर
खिलखिलाते रहो, खिलखिलाते रहो

रात जुगनू से बोली, सहर आने तक
झिलमिलाते रहो, झिलमिलाते रहो

पंछियों को जगा कर, ये बोली किरन
चहचहाते रहो, चहचहाते रहो

सर्द मौसम कहे, धूप के कान में
कुनमुनाते रहो, कुनमुनाते रहो

दिल में ख़ंजर उतारा कहा प्यार से
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

दिल की कुण्डी कभी तो खुलेगी सुनो
खटखटाते रहो, खटखटाते रहो

48 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. दिल की कुण्डी कभी तो खुलेगी सुनो
    खटखटाते रहो, खटखटाते रहो....बहुत सुंदर ...

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  3. माँ ने कहा यूँ ही रचना रच प्रसिद्धी पा कर
    चमकते रहो चमकते रहो

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  4. दिल में ख़ंजर उतारा कहा प्यार से
    मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
    वाह क्या बात है, मस्त है !

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  5. यह खटखटाना,झिलमिलाना सच्‍चे प्रेम को परिभाषित करता है....चाहे प्रेम प्रकृति से हो या प्रकृति के सबसे बड़े प्रतिनिधि मानव से।

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  6. प्रकृति से हम जीना सीख सकते हैं.
    सार गर्भित कविता.

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  7. गुनगुनाना, चहचहाना और मुस्कुराना आ गया तो समझो दिल का दरवाजा खुलवाना भी आ गया..

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  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  9. सहज, सुन्दर एवं रोचक पंक्तियाँ

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  10. ब्लॉग बुलेटिन आज की बुलेटिन, इंसान की दुकान मे जुबान का ताला - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  11. पंछियों को जगा कर, ये बोली किरन
    चहचहाते रहो, चहचहाते रहो

    दिल में ख़ंजर उतारा कहा प्यार से
    मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

    वाह! वाह! लाजवाब! बेहतरीन ग़ज़ल! हर शेर खूबसूरत..

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  12. आज तक कभी आपको इतनी लाइट ग़ज़ल कहते नहीं देखा भाई साहब! ऐसा लगा जैसे रमादान की छुट्टियों में आरामतलबी में कही गई ग़ज़ल है. मगर जो भी है, लाजवाब है!

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  13. शब्दों को आप नचाते हैं और वे खुशी-खुशी नाचते हैं । बहुत आसान सी लेकिन सारगर्भित रचना है यह ।

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  14. आशाएँ जगाते रहो, जगाते रहो!

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  15. बोलचाल की भाषा में लिखी इतनी भावपूर्ण और सुंदर रचना बहुत अर्से बाद पढ़ने को मिली है. बहुत ही सुंदर.

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  16. कबीर ने भी का है -
    आँखड़ियाँ झाईँ पड़ीं पंथ निहारि-निहारि,
    जीभड़ियाँ छला पड़्या,तोहि पुकार-पुकार !

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  17. और आप इसी तरह गीत और गज़ल लिखते रहो लिखते रहो...:)

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  18. सर्द मौसम कहे, धूप के कान में
    कुनमुनाते रहो, कुनमुनाते रहो
    दिल में ख़ंजर उतारा कहा प्यार से
    मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
    ...बहुत खूब! हर हाल में खुश रहना सीखना होगा ..

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  19. दिल की कुण्डी कभी तो खुलेगी सुनो
    खटखटाते रहो, खटखटाते रहो
    हहाआआ ! एकदम मस्त दिगंबर साब

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  20. अंतिम पंक्तियों के क्‍या कहने .... लाजवाब प्रस्‍तुति
    सादर

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  21. अंतिम पंक्तियों के क्‍या कहने .... लाजवाब प्रस्‍तुति
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  22. अंतिम पंक्तियों के क्‍या कहने .... लाजवाब प्रस्‍तुति
    सादर

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  25. खुबसूरत मीठे एहसास ...शुभकामनायें|

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  26. अच्छी ग़ज़ल कही है :

    दिल की कुण्डी कभी तो खुलेगी सुनो
    खटखटाते रहो, खटखटाते रहो

    गीत आये न आये सुनों दोस्तों -

    गुनगुनाते रहो गुनगुनाते रहो।

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  27. कभी -कभी कोई रचना कैसे ओंठों पर ठहर जाती है जिसके लिए दिल कहता है .. गुनगुनाते रहो..गुनगुनाते रहो..

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  28. खूबसूरत भाव... ज़िन्दगी को भरपूर जियो...संदेशप्रद रचना, बधाई.

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  29. आपकी इस रचना का लिंक कल दिनांक - ११ . ७ . २०१४ को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  30. यूँ ही सजती रहे एक उम्दा ग़ज़ल
    आप दिल से कलम बस चलते रहो.

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  31. वाह बहुत खूबसूरत रचना हार्दिक बधाई । उर्जा का संचार करने में सक्षम ।

    सादर आभार

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  33. दिल की कुण्डी कभी तो खुलेगी सुनो
    खटखटाते रहो, खटखटाते रहो... आशावादी रचना :)

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  34. दिल में ख़ंजर उतारा कहा प्यार से
    मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
    ...वाह..क्या बात है...बहुत प्यारी ग़ज़ल...

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    धन्यवाद !

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  38. बहुत ही गहरे भावो की अभिवयक्ति......

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  39. कर्मण्येवाधिकारस्ते...

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  40. bhaawo ko bahut acche se khatkhataya hai aapne.... waah !!

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है