सोमवार, 25 मार्च 2019

अरे “शिट” आखरी सिगरेट भी पी ली ...


सुनों छोड़ो चलो अब उठ भी जाएँ
कहीं बारिश से पहले घूम आएँ

यकीनन आज फिर इतवार होगा
उनीन्दा दिन है, बोझिल सी हवाएँ

हवेली तो नहीं पर पेड़ होंगे
चलो जामुन वहाँ से तोड़ लाएँ

नज़र भर हर नज़र देखेगी तुमको
कहीं काला सा इक टीका लगाएँ

पतंगें तो उड़ा आया है बचपन
चलो पिंजरे से अब पंछी उड़ाएँ

कहरवा दादरा की ताल बारिश
चलो इस ताल से हम सुर मिलाएँ

अरे “शिट” आखरी सिगरेट भी पी ली
ये बोझिल रात अब कैसे बिताएँ

सोमवार, 18 मार्च 2019

मेरे पहलू में इठलाए, तो क्या वो इश्क़ होगा ...


तेरी हर शै मुझे भाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 
मुझे तू देख शरमाए, तो क्या वो इश्क़ होगा  

हवा में गूंजती है जो हमेशा इश्क़ बन कर  
वो सरगम सुन नहीं पाए तो क्या वो इश्क़ होगा 

पिए ना जो कभी झूठा, मगर मिलने पे अकसर 
गटक जाए मेरी चाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

सभी से हँस के बोले, पीठ पीछे मुंह चिढ़ाए
मेरे नज़दीक इतराए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

हज़ारों बार हाए, बाय, उनको बोलने पर    
पलट के बोल दे हाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

सभी रिश्ते, बहू, बेटी, बहन, माँ, के निभा कर 
मेरे पहलू में इठलाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

तुझे सोचा नहीं होता अभी पर यूँ अचानक 
नज़र आएं तेरे साए तो क्या वो इश्क़ होगा 

हवा मगरिब, मैं मशरिक, उड़ के चुन्नी आसमानी 
मेरी जानिब चली आए तो क्या वो इश्क़ होगा 

उसे छू कर, मुझे छू कर, कभी जो शोख तितली  
उड़ी जाए, उड़ी जाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

तेरी पाज़ेब, बिन्दी, चूड़ियाँ, गजरा, अंगूठी 
जिसे देखूं वही गाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

मुझे तू एक टक देखे, कहीं खो जाए, पर फिर 
अचानक से जो मुस्काए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

सोमवार, 11 मार्च 2019

दुबारा क्या तिबारा ढूंढ लेंगे ...


सहारा बे-सहारा ढूंढ लेंगे
मुकद्दर का सितारा ढूंढ लेंगे

जो माँ की उँगलियों में था यकीनन
वो जादू का पिटारा ढूंढ लेंगे

गए जिस जिस जगह जा कर वहीं हम
हरा बुन्दा तुम्हारा ढूंढ लेंगे

मेरे कश्मीर की वादी है जन्नत
वहीं कोई शिकारा ढूंढ लेंगे

अभी इस जीन से कर लो गुज़ारा
अमीरी में शरारा ढूंढ लेंगे

बनाना है अगर उल्लू उन्हें तो
कहीं मुझ सा बेचारा ढूंढ लेंगे

नए हैं पंख सपने भी नये हैं       
गगन पे हम गुबारा ढूंढ लेंगे

सितारे रात भर टूटे जहाँ ... चल  
वहीं अपने दुबारा ढूंढ लेंगे

नहीं जो लक्ष्य हम, कोई तो होगा
किधर है ये इशारा ढूंढ लेंगे

पिघलती धूप के मंज़र पे मिलना
नया दिलकश नज़ारा ढूंढ लेंगे

जो मिल के खो गईं खुशियाँ कभी तो
दुबारा क्या तिबारा ढूंढ लेंगे