सोमवार, 1 अप्रैल 2019

शर्ट के टूटे बटन में रह गए ...


प्रेम के कुछ दाग तन में रह गए
इसलिए हम अंजुमन में रह गए

सब तो डूबे चुस्कियों में और हम
नर्म सी तेरी छुवन में रह गए

चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
कुछ निभाने की जतन में रह गए

छा गए किरदार कुछ आकाश पर
कुछ सिमट के पैरहन में रह गए

टूट कर सपने नहीं आए कभी 
कुछ गुबारे भी गगन में रह गए

अहमियत रिश्तों की कुछ समझी नहीं
अपने अपने ही बदन में रह गए

उड़ गई आंधी घरोंदे तोड़ कर 
सिरफिरे फिर भी चमन में रह गए

रेशमी धागे, मधुर एहसास, पल
शर्ट के टूटे बटन में रह गए

खिडकियों से आ गई ताज़ा हवा
हम मगर फिर भी घुटन में रह गए

52 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (02-04-2019) को "चेहरे पर लिखा अप्रैल फूल होता है" (चर्चा अंक-3293) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    अन्तर्राष्ट्रीय मूख दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वाहह्हह... वाहह्हह... बेहद शानदार गज़ल....
    हर शेर हर पंक्ति गज़ब की है...बेहद उम्दा सराहनीय सर....👌👌👌👌👌👏👏👏👏

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 02 अप्रैल 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. टूट कर सपने नहीं आए कभी
    कुछ गुबारे भी गगन में रह गए

    वाह बहुत सुंदर गज़ल

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  5. हर शेर सवा शेर।
    उम्दा बेहतरीन सृजन ।

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  6. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 01/04/2019 की बुलेटिन, " मूर्ख दिवस विशेष - आप मूर्ख हैं या समझदार !?“ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. रेशमी धागे, मधुर एहसास, पल
    शर्ट के टूटे बटन में रह गए
    अप्रतिम......., पूरी गज़ल लाजवाब...., इतनी सुन्दर कि जितना पढो हर बार मन को छूती हुई ही लगे ।

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  8. अश्क़, तड़पन, हिज्र तो सब ठीक है,
    तुम हमारी दास्ताँ क्यूँ कह गए?

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    1. बहुत अबह्र आपका गोपेश जी ... इस लाजवाब शेर के लिए ...
      एक शेर मेरी तरफ से आपके लिए ...
      पेश करना था कोई किस्सा नया
      यूँ ही अपनी दास्ताँ हम कह गए ...

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  9. व्व्व्वाह !
    चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
    कुछ निभाने की जतन में रह गए

    छा गए किरदार कुछ आकाश पर
    कुछ सिमट के पैरहन में रह गए

    ....लाजवाब आदरणीय

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  10. उत्तर
    1. अच्छा लगा आपको पुनः ब्लॉग पर देख कर ...
      बहुत आभार आपका ...

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  11. वाह ! बहुत उम्दा पेशकश..दुनियावी प्रेम कितना भी कोमल अहसास से भर दे एक दिन उसके भी पार जाना होता है, वरना खिडकियों से आती हवाएं भी मन को सुकून नहीं देतीं, ताजगी का संबंध तो किसी अनाम के साथ ही है..

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    उत्तर
    1. बहुत आभार है आपका इस विस्तृत टिप्पणी के लिए ...

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  12. वाह!!!
    एक और लाजवाब गजल बेहद उम्दा...
    चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
    कुछ निभाने की जतन में रह गए
    कमाल के शेर....एक से बढकर एक।




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  13. चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
    कुछ निभाने की जतन में रह गए

    क्या बात है क्या बात है। हर पंक्ति हर शब्द दमदार। बधाई सर। सादर।

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  14. सिरफिरे फिर भी चमन में रह गए ..आह हर शेर कितना कुछ समेटे .बहुत दिनों बाद देख सकी . सदा की तरह अभिभूत हूँ पढ़कर .

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  15. चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
    कुछ निभाने की जतन में रह गए
    ...वाह...सभी अशआर अपने आप में बहुत कुछ कहते हुए... बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल..

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  16. छा गए किरदार कुछ आकाश पर
    कुछ सिमट के पैरहन में रह गए।
    गजब की पंक्तियाँ हैं। हर शेर में एक नई बात दे देते हैं आप। बेहतरीन गजल। सादर।

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  17. बहुत खूब ,लाजबाब.. ,सादर नमस्कार आप को

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  18. सब तो डूबे चुस्कियों में और हम
    नर्म सी तेरी छुवन में रह गए

    चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
    कुछ निभाने की जतन में रह गए

    छा गए किरदार कुछ आकाश पर
    कुछ सिमट के पैरहन में रह गिए ..शायद ये ऐसे शब्द हैं जिनसे हर कोई अपने आपको आसानी से जोड़ सकता है ...हर किसी के अपने ..अपने दिल के शब्द ...शानदार

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  19. प्रामाणिक अनुभूतियों की छुवन को जीती हुई ग़ज़ल.

    टूट कर सपने नहीं आए कभी
    कुछ गुबारे भी गगन में रह गए

    रेशमी धागे, मधुर एहसास, पल
    शर्ट के टूटे बटन में रह गए

    टूटे बटन में रह गए.......यह तो बहुत ही सुंदर है.

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