सोमवार, 15 अप्रैल 2019

चाँद उतरता है होले से ज़ीने पर ...


हुस्नो-इश्क़, जुदाई, दारू पीने पर
मन करता है लिक्खूं नज़्म पसीने पर 

खिड़की से बाहर देखो ... अब देख भी लो  
क्यों पंगा लेती हो मेरे जीने पर 

सोहबत में बदनाम हुए तो ... क्या है तो 
यादों में रहते हैं यार कमीने पर    

लक्कड़ के लट्टू थे, कन्चे कांच के थे
दाम नहीं कुछ भी अनमोल नगीने पर

राशन, बिजली, पानी, ख्वाहिश, इच्छाएं
चुक जाता है सब कुछ यार महीने पर 

खुशबू, बातें, इश्क़ ... ये कब तक रोकोगे  
लोहे की दीवारें, चिलमन झीने पर

छूने से नज़रों के लहू टपकता है
इश्क़ लिखा है क्या सिन्दूर के सीने पर

और वजह क्या होगी ... तुझसे मिलना है
चाँद उतरता है होले से ज़ीने पर

42 टिप्‍पणियां:

  1. यकीनन पसीने पर लिक्खी नज़्म अनूठी होगी
    लाजवाब शेर .... लाजवाब नजरिया

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  2. उत्तर
    1. बहुत समय बाद आज आपको देख के अच्छा लगा ... आभार आदरणीय ...

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  3. बहुत ही लाजबाब गजल,नासवा जी।

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  4. वाह क्या बात है ।

    खिड़की से बाहर देखो ... अब देख भी लो
    क्यों पंगा लेती हो मेरे जीने पर

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  5. और वजह क्या होगी ... तुझसे मिलना है
    चाँद उतरता है होले से ज़ीने पर...
    ग़ज़ब के शेर हैं सारे के सारे... कभी मुस्कुराने पर मजबूर करते तो कभी गंभीरता से सोचने पर !!!
    जैसे - "राशन, बिजली, पानी, ख्वाहिश, इच्छाएं,
    चुक जाता है सब कुछ यार महीने पर"

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (16-04-2019) को "तुरुप का पत्ता" (चर्चा अंक-3307) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. छूने से नज़रों के लहू टपकता है
    इश्क़ लिखा है क्या सिन्दूर के सीने पर

    बहुत खूब ,लाजबाब ,सादर नमस्कार

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  8. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १६ अप्रैल २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  9. और वजह क्या होगी ... तुझसे मिलना है
    चाँद उतरता है होले से ज़ीने पर ..., बेहतरीन और लाजवाब... , बहुत ही सुन्दर ।

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  10. पसीने पर नज्म...वाह!!!

    खुशबू, बातें, इश्क़ ... ये कब तक रोकोगे
    लोहे की दीवारें, चिलमन झीने पर
    अद्भुत शब्दविन्यास.....

    और वजह क्या होगी ... तुझसे मिलना है
    चाँद उतरता है होले से ज़ीने पर
    वाहवाह...कमाल की गजल....
    मुकम्मल शेर...बहुत ही लाजवाब।


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  11. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 15/04/2019 की बुलेटिन, " १०० वीं जयंती पर भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह जी को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  12. बेहतरीन¡
    हर शेर लाजवाब हर शेर अलहदा भाव समेटे उम्दा
    शानदार।

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  13. और वजह क्या होगी ... तुझसे मिलना है
    चाँद उतरता है होले से ज़ीने पर....
    लाजवाब लेखन । और भला चाँद उतरे ही क्यूँ, वजह तो बस एक ही होगी। पारखी लेखन, साधुवाद ।

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  14. वाह। जेहनी अहसासों को बख़ूब लफ्जो में बयाँ किया है।

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  16. पहली दो पंक्तियाँ तुरत ग़ज़ल में डुबो देती हैं. शानदार.

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  17. वाह... और बस वाह.. जरूर लिखिये पसीने पर .आपने लिखा भी है . जब से दुष्यन्तकुमार या गोंडवी जी ने लिखा है तो हुस्न और शराब की नज्में पीछे छूट गईं .

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    1. आपका कहना सही है Adam Goundvi जी ने तो एक नई दिशा दी है ग़ज़ल लेखन को ...
      आपका आभार है ...

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